बिलासपुर जिले के घुटकु गांव में कोयला आधारित प्लांट्स के कारण ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। गांव में केवल एक ही मुख्य सड़क है, जिसका इस्तेमाल ट्रक और ग्रामीण दोनों करते हैं। इसी रास्ते से किसान अपने खेतों तक भी जाते हैं, लेकिन कोयले की धूल इतनी ज्यादा उड़ती है कि दिन में भी कुछ साफ दिखाई नहीं देता।
धूल से राहत देने के लिए दिन में दो बार सड़क पर पानी डाला जाता है, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा है। गांव से लगभग 2 किलोमीटर दूर एक और कोयला प्लांट है, जो शुरुआत में छोटी जमीन पर शुरू हुआ था। धीरे-धीरे इसके आसपास के खेत और जमीन प्रभावित होने लगे और कई किसानों को मजबूरी में अपनी जमीन बेचनी पड़ी। इसके बाद प्लांट ने अपना विस्तार कर लिया, जिससे ट्रकों की आवाजाही और बढ़ गई और सड़क पूरी तरह खराब हो गई है।
इस क्षेत्र में एक छोटा जंगल जैसा इलाका भी था, लेकिन वहां के पेड़-पौधे भी अब खत्म हो चुके हैं। पशुओं के लिए चारे की समस्या भी खड़ी हो गई है। करीब 4–5 साल पहले बनाए गए गौठान में आज तक पशु नहीं ले जाए गए, जिसका कारण भी भारी धूल बताया जा रहा है।
गांव में मौजूद एक और कोयला प्लांट सीधे बस्ती से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कोयले की धूल घरों तक पहुंचती है। यदि घर की छत पर कोई सामान रखा जाए, तो कुछ ही घंटों में वह काले धूल से ढक जाता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि गांव से बाहर जाने, स्कूल या अन्य जगहों पर जाने के लिए सिर्फ यही एक रास्ता है, जो पूरी तरह खराब हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय पंच और सरपंच समस्याएं हल करने के बजाय अवैध मिट्टी खनन कर उसे बेच रहे हैं।
लोगों का कहना है कि प्लांट लगातार अपना विस्तार कर रहे हैं और आसपास के खेत धूल व प्रदूषण से बर्बाद हो रहे हैं, जिससे किसान मजबूरी में अपनी जमीन बेच रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं पूरा गांव ही इन प्लांट्स के विस्तार की भेंट न चढ़ जाए।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्लांट मालिक उनसे जमीन खरीदने की बात करते हैं और बदले में दूसरी जगह जमीन देने का वादा करते हैं। वर्तमान में गांव में कुल 3 कोयला प्लांट होने से स्थिति और गंभीर होती जा रही है।



