बदलते खान-पान और बढ़ती बीमारियों के दौर में लोग अब फिर से कुदरत की ओर लौट रहे हैं। यही वजह है कि कभी आदिवासी इलाकों और गाँवों की थाली तक सीमित रहने वाला ‘देशी मुनगा’ (सहजन) आज शहरों के बड़े बाजारों और लग्ज़री किचन की पहली पसंद बनता जा रहा है।
ट्राइबल क्षेत्रों में पीढ़ियों से इस्तेमाल हो रहा मुनगा अब केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि सेहत का भरोसेमंद साथी बन चुका है। खास बात यह है कि चमक-दमक वाले हाइब्रिड मुनगा के मुकाबले देशी मुनगा के फूलों की मांग कई गुना बढ़ गई है।
शहर का हेल्थ सूप, गाँव का देसी गुडा
देशी मुनगा के फूलों ने शहर और गाँव के बीच एक अनोखा सेहत का पुल बना दिया है।
शहरों में फिटनेस और वेलनेस के शौकीन लोग इसके फूलों से डिटॉक्स सूप, हर्बल ड्रिंक और हेल्थ टी बना रहे हैं। वहीं गाँव और आदिवासी अंचलों में इन्हीं फूलों से तैयार होता है पारंपरिक ‘गुडा’ या ‘सुकटी’, जो स्वाद के साथ-साथ दवा का भी काम करता है।
फूलों को सुखाकर बनाई जाने वाली यह सुकटी आदिवासी समाज के लिए प्राकृतिक औषधि मानी जाती है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है।
हाइब्रिड सस्ता, लेकिन देशी की जीत
बाजार में हाइब्रिड सब्जियाँ भले ही सस्ती और देखने में आकर्षक हों, लेकिन स्वाद, पोषण और भरोसे के मामले में देशी मुनगा ने बाज़ी मार ली है।
शुद्ध देशी मुनगा के फूल आज 400 से 500 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं और फिर भी ग्राहक पीछे नहीं हट रहे।
लोग इसके आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के दीवाने हैं। खासकर एनीमिया (खून की कमी) और ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए इसे सुपरफूड माना जा रहा है।
पूर्वजों की देन, सेहत का आशीर्वाद
क्षेत्र के बुज़ुर्गों का कहना है कि मुनगा का फूल उनके लिए सिर्फ सब्जी नहीं, बल्कि पूर्वजों की दी हुई अमूल्य विरासत है।
साल भर इस्तेमाल के लिए फूलों को सुखाकर रखा जाता है, जिसे ज़रूरत पड़ने पर दवा की तरह खाया जाता है।
आयुर्वेद की सलाह
आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक, मुनगा के फूलों की तासीर गर्म होती है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।
गर्मी के मौसम में और एसिडिटी से परेशान लोगों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
गाँव से ग्लोबल तक की यात्रा
आज देशी मुनगा सिर्फ एक भोजन नहीं रहा। यह आदिवासी समाज की उस पारंपरिक समझ का प्रतीक है, जिसे अब आधुनिक दुनिया भी स्वीकार कर रही है।
गाँव की झोपड़ी से लेकर शहर के फाइव-स्टार होटल तक, देशी मुनगा ने अपनी शुद्धता और ताकत से पहचान बना ली है।



