बालोद।बालोद जिले में वक्फ बोर्ड के अंतर्गत दर्ज संपत्तियों को लेकर अब पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री और बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक उमेश कुमार सेन ने इस संबंध में जिला प्रशासन से विस्तृत जानकारी मांगी है। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जिला कलेक्टर एवं जन सूचना अधिकारी को आवेदन सौंपते हुए जिले में मौजूद वक्फ संपत्तियों की स्थिति, उपयोग और आय से जुड़ा पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
उमेश कुमार सेन का कहना है कि जिले में वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज भूमि, भवन और धार्मिक परिसंपत्तियों की वास्तविक स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी आम जनता के सामने नहीं है। इससे न केवल भ्रम की स्थिति बनती है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने साफ किया कि यह पहल किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया, जवाबदेही और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर की गई है।
आरटीआई आवेदन में उन्होंने बालोद जिले में वक्फ बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत सभी संपत्तियों—जैसे भूमि, मस्जिद, कब्रिस्तान, मदरसे, दरगाह और अन्य भवनों—की पूरी सूची और उनका विस्तृत पता मांगा है। इसके साथ ही खसरा नंबर, क्षेत्रफल, नक्शा और राजस्व रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
उन्होंने यह भी पूछा है कि संबंधित संपत्तियों का वर्तमान में किस प्रकार उपयोग हो रहा है—क्या वे व्यावसायिक उपयोग में हैं, किराये पर दी गई हैं, किसी संस्था द्वारा संचालित हैं या फिर खाली पड़ी हैं। इसके अलावा संपत्तियों के प्रबंधन और देखरेख की जिम्मेदारी किस समिति, संस्था या व्यक्ति के पास है, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
आरटीआई में वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय—जैसे किराया या लीज—का वर्षवार विवरण, साथ ही किसी भी प्रकार के विवाद, अतिक्रमण या न्यायालयीन प्रकरणों की जानकारी भी शामिल है। पिछले पांच वर्षों में संपत्तियों के रखरखाव, मरम्मत और विकास कार्यों पर हुए खर्च का ब्यौरा भी मांगा गया है।
यदि किसी वक्फ संपत्ति का अधिग्रहण किसी शासकीय विभाग या एजेंसी द्वारा किया गया है, तो उसकी तिथि और दिए गए मुआवजे की राशि का विवरण भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
उमेश कुमार सेन ने कहा कि यदि मांगी गई जानकारी संबंधित कार्यालय में उपलब्ध नहीं है, तो सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन को संबंधित विभाग या वक्फ बोर्ड को स्थानांतरित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तय समय-सीमा के भीतर निष्पक्ष और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किसी भी संपत्ति का उपयोग, आय और रखरखाव जनता से छिपाया नहीं जा सकता। यह विषय आस्था का नहीं, बल्कि कानून, पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।







