बस्तर पहुंचे अमित शाह, मुरिया दरबार में जनजातीय प्रतिनिधियों से सीधा संवाद

Madhya Bharat Desk
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जगदलपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल होने जगदलपुर पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन किए और फिर सिराहसारा भवन में आयोजित मुरिया दरबार में मांझी-मुखिया, चालकी, गायता व अन्य जनजातीय प्रतिनिधियों से संवाद कर रहे हैं।

शाह के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद हैं। गृहमंत्री ने लालबाग स्थित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और दशहरा लोकोत्सव में भाग लेने पहुंचे।

यह पहला अवसर है जब कोई केंद्रीय गृहमंत्री सीधे मुरिया दरबार में बैठकर 80 परगनों से आए आदिवासी प्रतिनिधियों की समस्याएं सुन रहे हैं। 145 वर्षों से जारी इस परंपरा में शाह की मौजूदगी इसे ऐतिहासिक बना रही है।

माओवाद पर सख्त रुख, जनजातीय परंपराओं को प्राथमिकता

गृहमंत्री शाह ने माओवाद के खात्मे के लिए 30 मार्च 2026 तक का लक्ष्य तय किया है। बीते 22 महीनों में यह उनका छठा बस्तर दौरा है। हर बार उन्होंने माओवादियों को आत्मसमर्पण की चेतावनी दी है। शाह का कहना है कि सुरक्षा बल सख्ती से जवाब देंगे, लेकिन जो आत्मसमर्पण करेंगे, उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा।

पिछले साल अप्रैल 2025 को वे दंतेवाड़ा के बस्तर पंडुम मेले में शामिल हुए थे और आदिवासी संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच दिलाने का संकल्प लिया था। इस बार वे बस्तर दशहरे में शामिल होकर उसी संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं।

मुरिया विद्रोह से जुड़ी परंपरा

1876 में अंग्रेजी शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ झाड़ा सिरहा के नेतृत्व में मुरिया विद्रोह हुआ था। इसके बाद से दशहरे पर राजमहल की बजाय झाड़ा सिरहा की गुड़ी में मुरिया दरबार लगने लगा। यह जनजातीय अधिकार और एकता का प्रतीक है।

1965 तक महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव इसकी अध्यक्षता करते रहे। वर्तमान में शासन और प्रशासन की मौजूदगी में यह परंपरा कायम है।

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