छत्तीसगढ़ में दिव्यांगों के हित में संचालित स्टेट रिसोर्स सेंटर और फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर (PRC) में लगभग ₹1000 करोड़ के भारी-भरकम घोटाले का खुलासा हुआ है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है।
इस घोटाले में आरोप है कि दिव्यांगों के कल्याण के लिए केंद्र और राज्य सरकार से आए फंड को फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकालकर हड़प लिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा–
“यह केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर व्यवस्थित भ्रष्टाचार का मामला है।”
कोर्ट के आदेश के बाद अब CBI इस मामले की गहराई से जांच करेगी। जांच में सरकारी फंड की हेराफेरी, गबन करने वाले नेटवर्क और इसमें शामिल उच्च अधिकारियों तक की भूमिका की पड़ताल होगी। यह घोटाला न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि दिव्यांगों की भलाई के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर भी गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाता है।







