जल जीवन मिशन: भुगतान अटका, ठेकेदार बोले—प्रशासनिक उदासीनता ने किया बर्बाद

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। जल जीवन मिशन के तहत वर्षों पहले कार्य पूरा कर चुके पीएचई विभाग के अनेक ठेकेदार आज भी अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि भारत सरकार से राशि उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है और इसके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव एवं जल जीवन मिशन के मिशन संचालक मोहम्मद कैसर अब्दुल हक और अतिरिक्त मिशन संचालक ओंकेश चन्द्रवंशी की प्रशासनिक कार्यशैली की है।

ठेकेदारों का कहना है कि मिशन के संचालकों की जिम्मेदारी केवल फाइलों का संचालन करना नहीं, बल्कि कलेक्टरों, पंचायतों और बिजली विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण कराना भी है। उनका आरोप है कि ऐसा नहीं होने के कारण वर्षों से पात्र ठेकेदार भुगतान के लिए भटक रहे हैं।

आरोप है कि भारत सरकार से जल जीवन मिशन के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान में तेजी लाने के लिए कोई विशेष अभियान नहीं चलाया गया। यदि पूर्णता प्रमाण-पत्र लंबित हैं तो उन्हें जारी कराने के लिए जिला प्रशासन के साथ नियमित समीक्षा बैठकें क्यों नहीं हुईं? यदि बिजली कनेक्शन और पंचायत स्तर की अड़चनें हैं तो उनका समाधान क्यों नहीं कराया गया? ये सवाल सीधे मिशन संचालक और अतिरिक्त मिशन संचालक की कार्यशैली पर उठ रहे हैं।

कई ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने बैंक से ऋण लेकर और ऊंची ब्याज दर पर पैसा उठाकर कार्य पूरे किए। कई योजनाओं में ग्रामीणों को पानी भी मिल रहा है, लेकिन भुगतान न मिलने से ठेकेदार आर्थिक संकट में हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण कई ठेकेदार भारी कर्ज में डूब गए हैं।

ठेकेदारों का यह भी आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक देरी ने पूरे जल जीवन मिशन की रफ्तार को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि यदि दोनों मिशन संचालकों मोहम्मद कैसर अब्दुल हक और ओंकेश चन्द्रवंशी द्वारा सही जवाबदेही तय होती और नियमित मॉनिटरिंग होती, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। यदि भुगतान लंबित है तो सवाल यह उठता है कि मिशन संचालकों ने इसके लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए।

ठेकेदारों का आरोप है कि सचिव स्तर और संचालन पर प्रभावी निर्णय और समन्वय के अभाव में वे वर्षों से आर्थिक संकट झेल रहे हैं। अब वे नीर भवन का घेराव कर अपने भुगतान की मांग उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों ने कार्य पूरा कर दिया है, उनका भुगतान तत्काल कराया जाए और भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

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