सुकमा।पूरे प्रदेश में विकास के दावों के बीच सुकमा के एलंपल्ली से सामने आई एक तस्वीर स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यहां 45 वर्षीय बीमार महिला को एंबुलेंस खराब होने के कारण खाट में बैठाकर कई किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
बताया जा रहा है कि जरूरत के वक्त एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों को महिला को खाट के सहारे अस्पताल तक ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह तस्वीर सिर्फ एक मरीज की परेशानी नहीं, बल्कि दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सरकारी व्यवस्थाओं की तैयारियों पर बड़ा सवाल है।
सरकार लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों तक बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के दावे करती है, लेकिन एलंपल्ली की यह तस्वीर उन दावों की जमीनी हकीकत पर सवालिया निशान लगाती है। आखिर जब किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं हो, तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था किसके लिए और कितनी प्रभावी है?
विकास अगर प्रदेश के बड़े शहरों या चुनिंदा इलाकों तक ही सीमित रह जाए और सुदूर गांवों में मरीजों को खाट के सहारे अस्पताल जाना पड़े, तो इसे विकास नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता कहना ज्यादा उचित होगा।
स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए एंबुलेंस की स्थिति, उसके खराब होने के कारण और ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की जांच करनी चाहिए। सवाल यह भी है कि सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ उन इलाकों तक कब पहुंचेगा, जहां आज भी एक एंबुलेंस की कमी मरीज की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।






