कोरबा।छत्तीसगढ़ के कोरबा में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की मानिकपुर कोयला खदान के विस्तार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और भू-विस्थापितों का विरोध तेज हो गया है। 21 अगस्त को होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई के विरोध में दादर खुर्द (वार्ड 34) के रहवासी और भू-विस्थापित संगठन लोगों से संपर्क कर रहे हैं। कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनसुनवाई का पूरी तरह बहिष्कार करने की अपील कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पिछले करीब छह दशकों से लंबित मुआवजा, पुनर्वास और स्थायी रोजगार से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होता, तब तक वे खदान विस्तार का समर्थन नहीं करेंगे।
इसी बीच मानिकपुर क्षेत्र की ठेका और निजी कंपनियों में भूमिपतियों को प्राथमिकता देने के मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों और बीएमएस यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने महाप्रबंधक सुशील गर्ग से मुलाकात की। बातचीत के बाद प्रबंधन ने करीब 500 विस्थापित युवाओं को निजी कंपनियों में नौकरी और स्थानीय ठेकेदारी के काम में प्राथमिकता देने पर सहमति जताई है।
बैठक में क्षेत्र की खराब सड़कों, जर्जर पुल-पुलियों की मरम्मत और बढ़ते कोयला प्रदूषण पर भी जल्द कार्रवाई की मांग की गई।
मामले को लेकर पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल ने मंगलवार को प्रभावित आठ गांवों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद उन्होंने SECL के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (CMD) हरीश दुहन को पत्र भेजकर 21 अगस्त की जनसुनवाई को फिलहाल स्थगित करने की मांग की।
अग्रवाल ने कहा कि वे क्षेत्र के विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन वर्षों से यहां रह रहे परिवारों के अधिकारों की अनदेखी करके विकास करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि पहले पुराने मुआवजा और विस्थापन से जुड़े मामलों का स्थायी समाधान किया जाए, इसके बाद ही खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
बताया गया है कि प्रभावित परिवारों की जमीन का पहला अधिग्रहण वर्ष 1964 में बेहद कम मुआवजे पर किया गया था। करीब 60 साल गुजरने के बाद भी कई विस्थापित परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुरानी खदानों का संचालन जारी रहने के बावजूद कई परिवारों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, अब बची हुई जमीनों को भी करीब 6.50 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से अधिग्रहित करने की तैयारी की जा रही है। इसे लेकर भू-स्वामियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।





