रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनजातीय समाज के प्रति संवेदनशील सोच अब जमीनी रूप लेने लगी है। मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष जनजातीय गौरव दिवस पर जो घोषणा की थी, उसके तहत अब ‘मुख्यमंत्री बैगा, गुनिया-हड़जोड़ सम्मान योजना’ को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग के बैगा, गुनिया और हड़जोड़ समुदायों के पारंपरिक वनौषधीय चिकित्सकों को प्रति वर्ष 5,000 रुपये की सम्मान सह-प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इस योजना का उद्देश्य न केवल जनजातीय परंपराओं का संरक्षण करना है, बल्कि उन लोगों के योगदान को भी मान्यता देना है जो अपने पारंपरिक ज्ञान से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षों से लोगों का इलाज करते आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी वनौषधीय चिकित्सा का ज्ञान चलता आया है, और यही परंपरा बैगा, गुनिया और हड़जोड़ जैसे लोगों ने आज तक जीवित रखी है।
आदिम जाति विकास विभाग की अधिसूचना के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य इन पारंपरिक चिकित्सकों के ज्ञान को संरक्षित रखना, उसे अगली पीढ़ियों तक पहुंचाना और उनके चिकित्सा अनुभवों का अभिलेखीकरण करना है। इससे उनकी जीविका को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि इन जनजातीय वैद्यों की सेवाएं समाज के लिए अत्यंत मूल्यवान हैं। वे वर्षों से जंगलों की जड़ी-बूटियों के माध्यम से बीमारियों का इलाज करते आए हैं, जिनसे ग्रामीण समाज को बड़ी राहत मिली है। ऐसे लोगों को आर्थिक और सामाजिक सम्मान देकर न केवल उनके जीवन में स्थिरता आएगी, बल्कि उनके पारंपरिक ज्ञान को भी नई पीढ़ी में स्थान मिलेगा।
यह योजना मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें आधुनिक विकास के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान और संस्कृति को भी समान महत्व दिया गया है। अब राज्य सरकार ऐसे बैगा, गुनिया और हड़जोड़ व्यक्तियों की पहचान करेगी जो पिछले तीन वर्षों से लगातार वनौषधीय सेवा कार्य में लगे हैं। इन सभी को हर साल 5,000 रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी ताकि वे अपनी सेवा जारी रख सकें और जनजातीय चिकित्सा की विरासत को आगे बढ़ा सकें।


