रायपुर।छत्तीसगढ़ की निजी यूनिवर्सिटियों में तकनीकी और प्रोफेशनल कोर्स की फीस और एडमिशन को लेकर सरकारी निर्देशों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
2024 से अगस्त 2026 तक इस संबंध में लगातार पत्र और निर्देश जारी किए गए हैं। दस्तावेजों से पता चलता है कि फीस तय करने और दाखिले की प्रक्रिया को लेकर अब भी पूरी तरह एक जैसी व्यवस्था नहीं बन पाई है।
सरकार ने साफ किया है कि नियमों के दायरे में आने वाले कोर्स की फीस संबंधित शुल्क निर्धारण समिति के जरिए ही तय होनी चाहिए। वहीं BE/BTech, MTech, MBA, MCA, फार्मेसी और डिप्लोमा जैसे कोर्स में तय प्रवेश परीक्षा और मेरिट के आधार पर एडमिशन देने के निर्देश दिए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ये नियम साल 2008 से लागू हैं, तो निजी यूनिवर्सिटियों को बार-बार फीस और एडमिशन के नियमों की जानकारी क्यों देनी पड़ रही है?
DTE ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों के खिलाफ दिया गया एडमिशन अमान्य माना जा सकता है। ऐसे में छात्रों के लिए फीस, डिग्री की मान्यता और दूसरी शैक्षणिक सुविधाओं को लेकर परेशानी खड़ी होने का खतरा बना हुआ है।






