प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी अब महामारी बनती जा रही है। दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र के पेंड्रावन स्थित सरकारी आत्मानंद स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर शुक्रवार को स्कूली छात्रों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। पढ़ाई प्रभावित होने से नाराज बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं खैरागढ़-धमधा मुख्य मार्ग पर बैठ गए और चक्काजाम कर दिया।
मामला शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के गृह जिले दुर्ग से जुड़ा है। ऐसे में शिक्षा मंत्री के ही गृह जिले में सरकारी स्कूल के बच्चों को पर्याप्त शिक्षकों की मांग को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा, तो प्रदेश के दूसरे जिलों के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे अपनी पढ़ाई के लिए सड़क पर उतर आए। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें राजनीति नहीं चाहिए, उन्हें स्कूल में शिक्षक चाहिए। विषयवार शिक्षक नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और पाठ्यक्रम पूरा करने में परेशानी आ रही है।
बच्चों का कहना है कि वे स्कूल आकर पढ़ना चाहते हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्कूल में आवश्यक संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।
मंत्री के गृह जिले में व्यवस्था पर सवाल
पेंड्रावन स्कूल दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में आता है। यही वजह है कि इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के सामने भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब शिक्षा मंत्री के गृह जिले में ही विद्यार्थियों को शिक्षकों की कमी के खिलाफ चक्काजाम करना पड़े, तो प्रदेश के दूरस्थ इलाकों के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल में शिक्षक मिलना उनका अधिकार है। पढ़ाई जैसी बुनियादी जरूरत के लिए उन्हें बार-बार सड़क पर उतरकर आवाज न उठानी पड़े, इसके लिए प्रशासन को शिक्षकों की कमी का स्थायी समाधान करना चाहिए।
पेंड्रावन की घटना ने एक बार फिर प्रदेश की सरकारी स्कूल व्यवस्था में शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बहस छेड़ दी है।





