बीजापुर।कुटरू–मंगापेटा मार्ग पर एक तेंदुए का दिन के उजाले में सड़क पर खुलेआम घूमता हुआ मोबाइल कैमरे में कैद होना स्थानीय लोगों के बीच भय और चिंता का कारण बन गया है। यह घटना उस समय सामने आई है जब नेशनल पार्क के भीतर हाल ही में बाघ के शिकार की खबरें भी आ चुकी हैं, जिससे इलाके में जंगली जानवरों की गतिविधियों में अचानक वृद्धि के संकेत मिलने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे खेतों में जाने, पशु चराने और बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर अब सतर्क और परेशान हैं। कई निवासियों ने कहा कि वीडियो फुटेज में दिखने वाला तेंदुआ देख कर पता चलता है कि सुरक्षा इंतजाम अपर्याप्त हैं और वन क्षेत्र एवं ग्रामीण सीमाओं के बीच संरक्षण व सुरक्षा का संतुलन बिगड़ रहा है। स्थानीय एनजीओ कार्यकर्ता भी बताते हैं कि ऐसी घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं और समुदायों में भरोसा कम होता जा रहा है।
स्थानीय और विशेषज्ञ स्तर पर CAMPA (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority) फंड से जुड़ा सवाल जोर पकड़ रहा है; दावे हैं कि क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन उसी के बावजूद बायोफेंसिंग, चौकियों, रैपिड रिस्पॉन्स टीमों, और समुदाय-आधारित संघर्ष शमन कार्यक्रमों में पारदर्शी और प्राथमिक निवेश नहीं दिखता। इससे उठ रहे मुख्य सवालों में शामिल हैं कि कैंपा का पैसा कहां खर्च हुआ, क्या खर्च का ऑडिट और रिपोर्ट जनता के लिए उपलब्ध है, और क्या विभाग ने मानव–पशु संघर्ष की रोकथाम के लिए प्रभावी योजनाएँ लागू की हैं।





