NEET-UG पेपर लीक पर जल्द कार्रवाई के लिए सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का बड़ा ऐलान किया था। इस मामले की पहली सुनवाई सोमवार को होनी थी, लेकिन शुरुआत में ही मामला अटक गया। पहले ही दिन सुनवाई 3 अगस्त तक टालनी पड़ी क्योंकि रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई की ओर से कोई सरकारी वकील कोर्ट में पेश नहीं हुआ। ऐसे में अदालत ने अगली तारीख तय कर दी।
आरोपियों की जमानत याचिका पर होनी थी सुनवाई
स्पेशल जज अनु ग्रोवर बलीगा की फास्ट ट्रैक कोर्ट में NEET पेपर लीक मामले में गिरफ्तार बिकास बिवाल और दिनेश बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। आरोपियों की ओर से वरिष्ठ वकील ए.पी. सिंह कोर्ट में मौजूद थे, लेकिन सीबीआई की तरफ से कोई वकील नहीं पहुंचा। इसके बाद अदालत ने सरकार को जल्द से जल्द लोक अभियोजक (पब्लिक प्रॉसीक्यूटर) नियुक्त करने का निर्देश दिया।
3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी। अदालत ने साफ कहा है कि अगली तारीख पर सरकार की ओर से नियुक्त सरकारी वकील का मौजूद रहना जरूरी होगा।
हाल ही में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है। इन अदालतों में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई की जाएगी। वहीं सरकार ने इस कानून में संशोधन का विधेयक भी संसद में पेश किया है। नए प्रावधानों के तहत जुर्माना करीब पांच गुना बढ़ाया गया है और दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है।
13 आरोपियों में शामिल हैं दोनों आरोपी
सीबीआई अब तक इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें दिनेश बिवाल और बिकास बिवाल भी शामिल हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने NEET पेपर लीक होने के बाद उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को कहा था कि पेपर लीक से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि सरकार के लिए युवाओं का भविष्य और हित सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
आंदोलन के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
NEET पेपर लीक को लेकर “कॉकरोच जनता पार्टी” ने 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद यह मुद्दा और गरमा गया। इसके बाद विपक्ष ने भी सरकार पर लगातार सवाल उठाए। वहीं सरकार का कहना है कि वह छात्रों और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। इसी क्रम में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।






