बालोद।धान खरीदी शुरू होने से पहले ही रेल अधिकारियों और छत्तीसगढ़ विपणन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही खुलकर सामने आने लगी है। एक ओर रेलवे के जर्जर और टूटे-फूटे माल डिब्बों में खाली बरदाना (धान के बोरे) बारिश के पानी में भीगकर रैक पॉइंट तक पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ विपणन विभाग के अधिकारी बिना जांच-पड़ताल किए उसी गीले और खराब बरदाने को उतरवाकर ट्रकों के माध्यम से गोदामों तक भेज रहे हैं। इससे शासन को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
धान भरने के लिए खाली बरदाना रेल रैक के माध्यम से विभिन्न जिलों में पहुंचाया जा रहा है, लेकिन जिन रेल डिब्बों में इसका परिवहन हो रहा है उनकी हालत बेहद खस्ता है। डिब्बे टूटे-फूटे होने के कारण बारिश का पानी सीधे अंदर पहुंच रहा है, जिससे पूरा बरदाना गीला होकर खराब हो रहा है। यह स्थिति रेलवे अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि परिवहन से पहले डिब्बों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ऐसे लाचार परिवहन व्यवस्था के चलते जहां रेल विभाग अपनी कुंभकर्णी निंद में सोई हुई है और बस नारों पर रेल्वे का आधुनिकरण का नारा बुलंद कर कागजों पर वाहवाही करती रहती है पर व्यवस्था ज्यों का त्यों है, इसका खामियाजा खाद ,नमक व सीमेंट के व्यवसायियों को भुगतना पड़ता है, विभाग किंकर्तव्यविमूढ़ की मुद्रा में बैठे है।
वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ विपणन विभाग के अधिकारी भी इस गंभीर मामले से बेखबर बने हुए हैं। जैसा बरदाना रेलवे से पहुंच रहा है, उसे उसी हालत में स्वीकार कर लिया जा रहा है। गीले बरदाने को ट्रकों में भरकर अन्य गोदामों में भेजा जा रहा है, जबकि यह स्पष्ट है कि कुछ समय बाद यह उपयोग के लायक नहीं रहेगा। इसके बावजूद किसी स्तर पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई जा रही और न ही जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई की जा रही है।


बालोद रैक पॉइंट पर शुक्रवार को टूटे हुए रेल डिब्बों में पहुंचा खाली बरदाना पूरी तरह गीला मिला। इसके बावजूद जिला विपणन विभाग के अधिकारियों ने इसे अस्वीकार करने के बजाय अन्य गोदामों के लिए रवाना कर दिया। आशंका है कि दो माह बाद धान खरीदी शुरू होने पर यही बरदाना खरीदी केंद्रों तक पहुंचेगा, जिससे कर्मचारियों को परेशानी होगी और किसानों को भी बोरे की कमी का सामना करना पड़ेगा।
हर वर्ष धान खरीदी के दौरान बोरों की कमी के कारण किसानों को खरीदी केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और फसल बेचने में दिक्कत होती है। यदि अभी से गीले और खराब बरदाने को स्वीकार किया जा रहा है, तो आने वाले खरीदी सीजन में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नुकसान अभी से दिखाई दे रहा है, तब भी रेल अधिकारियों और छत्तीसगढ़ विपणन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। आशंका है कि बाद में जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होगी, छोटे कर्मचारियों पर जिम्मेदारी डाल दी जाएगी और वास्तविक जिम्मेदार अधिकारी बच निकलेंगे। समय रहते इस लापरवाही पर रोक नहीं लगी तो इसका सीधा नुकसान किसानों और शासन दोनों को उठाना पड़ेगा।







