DMF फंड में बड़ी गड़बड़ी! CAG रिपोर्ट में करोड़ों के खर्च पर उठे सवाल

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट ने राज्य में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में खनिज फंड के प्रबंधन, योजनाओं की प्लानिंग और उनके क्रियान्वयन में बड़ी खामियां और अनियमितताएं सामने आई हैं। इससे साफ है कि जिस उद्देश्य से यह फंड बनाया गया था, उसका पूरा लाभ जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच पाया।

केंद्र सरकार ने सितंबर 2015 में इस योजना की शुरुआत खनन प्रभावित लोगों और इलाकों के विकास के लिए की थी। इसके तहत जिला स्तर पर फंड इकट्ठा कर विकास कार्य किए जाने थे। छत्तीसगढ़ में ट्रस्टों ने उपलब्ध राशि का करीब 81 प्रतिशत यानी 4,536.58 करोड़ रुपये खर्च भी कर दिए, लेकिन सही योजना और प्राथमिकता के अभाव में इसका पूरा फायदा प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच सका।

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में शामिल 11 जिलों के 1,734 सीधे प्रभावित गांवों में से 754 गांव (करीब 44 प्रतिशत) ऐसे रहे, जहां कोई विकास कार्य ही नहीं हुआ। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि नियमों के मुताबिक वार्षिक बजट, विजन डॉक्यूमेंट और मास्टर प्लान तैयार किए बिना ही करोड़ों रुपये के काम मंजूर कर दिए गए।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ट्रस्ट बनने के बाद प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने में 5 से 65 महीने तक की देरी हुई। इस दौरान नियमों का पालन किए बिना ही 1,060.70 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दे दी गई। प्रभावित गांवों को विधिवत अधिसूचित करने की बजाय सिर्फ जिला कलेक्टरों के कार्यालय आदेशों के आधार पर काम चलाया गया।

ऑडिट में यह भी पाया गया कि अधिकारियों की लापरवाही और कमजोर निगरानी के कारण 41.80 करोड़ रुपये ऐसे अधूरे प्रोजेक्ट्स और बेकार पड़ी संपत्तियों पर खर्च हो गए, जिनका लोगों को कोई फायदा नहीं मिल रहा। इनमें बायोगैस बिजली संयंत्र, कला एवं संस्कृति केंद्र, पोल्ट्री यूनिट और मशरूम उत्पादन केंद्र जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं, जो अब अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।

फंड के इस्तेमाल में भी नियमों की अनदेखी की गई। रिपोर्ट के मुताबिक 30.73 करोड़ रुपये सरकारी दफ्तरों के निर्माण, मरम्मत और सौंदर्यीकरण जैसे गैर-प्राथमिकता वाले कार्यों पर खर्च कर दिए गए, जबकि यह राशि खनन प्रभावित लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए इस्तेमाल होनी चाहिए थी।

खरीद प्रक्रिया में भी छत्तीसगढ़ स्टोर परचेज रूल्स, 2002 का उल्लंघन सामने आया। 17.49 करोड़ रुपये के काम बिना ओपन टेंडर के सिर्फ चुनिंदा कोटेशन के आधार पर दिए गए, जबकि 38.82 करोड़ रुपये की खरीद बिना किसी तकनीकी औचित्य के की गई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राज्य स्तर पर निगरानी करने वाली समितियों की बैठकें समय पर नहीं हुईं। साथ ही जिलों की वेबसाइटों पर बजट, खर्च और बैठकों की जानकारी भी नियमित रूप से अपडेट नहीं की गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।

इसके अलावा फील्ड स्तर पर कर्मचारियों की भारी कमी भी सामने आई। बेमेतरा और महासमुंद जैसे जिलों में स्वीकृत सभी पद खाली पाए गए। CAG ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय प्रबंधन मजबूत करने, पारदर्शिता बढ़ाने और जवाबदेही तय करने की सिफारिश की है, ताकि खनन प्रभावित लोगों को उनके अधिकार और योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।

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