हाईकमान का आदेश: 14 मंत्रियों के नकारात्मक रिपोर्ट के बाद संगठन सक्रिय!

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।प्रदेश में जमीन से जुड़े कार्यरताओं के लगातार मंत्रियों और उनके OSD के दिल्ली हाईकमान से शिकायत के बाद हाईकमान ने छत्तीसगढ़ में अचानक मंत्रियों का बैठक बुलाने का फैसला लिया।

इस बैठक में सभी संगठन मंत्री शामिल हुए थे। छत्तीसगढ़ के संगठन महामंत्री पवन साय, प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल इस बैठक में शामिल हुए थे। इसके अलावा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी इस बैठक में वर्चुअल रूप से शामिल हुए थे। इन संगठन महामंत्रियों का इस बैठक में शामिल होना बताता है कि जमीन से जुड़े संगठन के कार्यकर्ताओं को पार्टी में कितना तवज्जोह दिया जा रहा है।

प्रदेश में भाजपा के 14 मंत्री है जिसमें सभी का IB रिपोर्ट नकारात्मक रहा है। इसमें से तो 5 मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड बहुत ज्यादा खराब रहा है। ऐसे में जमीन स्तर के संगठन कार्यकर्ताओं के शिकायत के बाद हाईकमान से अचानक बैठक का फैसला लिया गया। 

गौरतलब है कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं ने लगातार शिकायतें हाईकमान से की। शिकायतें मंत्रियों और उनके OSD दोनों की गई क्योंकि इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि इनके वजह से उन कार्यकर्ताओं का कोई महत्व नहीं रह गया है जो पार्टी और संगठन को मजबूत बनाने के लिए मेहनत कर रहे है और इन कार्यकताओ को बाहर का रास्ता दिखाने में लगे हुए है।

इन्हीं शिकायतों को लेकर हाईकमान से आदेश के बाद यह आपातकाल बैठक आयोजित किया गया था जिसमें फैसला भी कुछ अलग तरीकों से लिया गया है। अब यह अटकले तेज है कि पार्टी और संगठन के कार्यकर्ता मिलकर OSD की समीक्षा करेंगे। अगर ऐसा होता है तो यह छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहली बार होगा जिसमें  सरकार और संगठन मिलकर किसी शासकीय अधिकारी का समीक्षा करेंगे।

बैठक का एक मुद्दा यह भी था कि मंत्रियों के OSD इतने ताकतवर हो गए है कि जमीन से जुड़े छोटे कार्यकर्ताओं को बाहर खदेड़ रहे है तो संगठन के यह कार्यकर्ता आखिर कहां जाएंगे?

इस आपातकाल बैठक को लेकर इन चर्चाओं ने भी जोरो शोरों से जोर पकड़ा था कि छत्तीसगढ़ के मंत्रिमंडल में विस्तार होने जा रहा है। अचानक मंत्रियों की बैठक बुलाने की खबर फैलते ही सत्ता गलियारों में कुछ लोग दिन में सपने देखने जैसे सरकार बदलने की बात करने लगे। किसी ने गुजरात मॉडल खोज लिया तो कुछ उत्साही समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अपने एक नेता को मुख्यमंत्री घोषित करने में भी देर नहीं लगाई।

इस अचानक बैठक में ऐसे कई चर्चाएं होने लगी थी पर अब मंत्रियों के अधिकारियों की शिकायत और हाईकमान से जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को जोड़ने के आदेश एवं सरकार और संगठन का शासकीय अधिकारियों का समीक्षा करने वाली बात के बाद सभी तरह की चर्चाओं में विराम लग गया है।

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