रायपुर।छत्तीसगढ़ में शासकीय, आदिवासी, वन, सिंचाई विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य सार्वजनिक भूमि जैसे 55 लाख एकड़ भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण को लेकर मामला गरमाया हुआ है।
छत्तीसगढ़ समाज पार्टी, छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा, सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज और इनके नेतृत्वकर्ता अनिल दुबे ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में अधिकारियों और भूमाफिया के गठजोड़ ने बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद-फरोख्त कर सरकारी संसाधनों को नुकसान पहुंचाया है।
संगठनों का दावा है कि बाहरी उद्योगों और निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। विशेष रूप से कृपा पावर प्राइवेट लिमिटेड और नूतन आयरन एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े भूमि मामलों में फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
किसान संगठनों ने महासमुंद जिले के तत्कालीन और वर्तमान प्रशासनिक अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि महासमुंद जिलाधीश विनय कुमार लंगेह, नीलेश क्षिरसागर, प्रभात मालिक, एसडीएम भागवत जायसवाल, उमेश कुमार साहू, हरिशंकर पैकरा, सुश्री अक्षा गुप्ता, नायब तहसीलदार खीरसागर बघेल, श्रीधर पंडा, टूकेन्द्र नुरेटी, श्रीमती तृप्ति चंद्राकर, मोहित कुमार अमिला, आर आई महेश बंजारे, पटवारी धर्मेंद्र मन्नाड़े, अरविन्द चंद्राकर ने माननीय उच्च न्यायलय के आदेश का भी पालन नहीं किया!


संगठनों के अनुसार, उनकी शपथपत्र सहित की गई शिकायत पर राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्य सचिव के निर्देश पर अवर सचिव स्तर से मामले की जांच की जा रही है।
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण सेनानी, छत्तीसगढ़ समाज पार्टी, छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा और सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के नेतृत्वकर्ता अनिल दुबे ने जांच नोटिस जारी होने के 24 घंटे के भीतर उन्होंने कथित भ्रष्टाचार से जुड़े 233 पृष्ठों के दस्तावेज सामान्य प्रशासन विभाग को सौंप दिए हैं।
संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।





