रायपुर। प्रदेश में भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारियों का आतंक बढ़ता जा रहा है जो अब किसानों तक का हक मारने में लगे हुए है। अब तो खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभाग में ही भ्रष्टाचार का मामला सामने आने लगा है। जल संसाधन विभाग में करोड़ों रुपए का हेरा फेरी उजागर हुआ है।
राजिम क्षेत्र के पितईबंद माइनर निर्माण कार्य में करोड़ों रुपए की लागत से बनाई जा रही नहर को लेकर ग्रामीणों और किसानों ने गंभीर अनियमितताओं तथा भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि अधिकारियों ने मूल ड्राइंग डिजाइन में मनमाने तरीके से परिवर्तन कर नहर को नाली का रूप दे दिया, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को सिंचाई का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।
किसानों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि नहर के बेड की मोटाई केवल साढ़े तीन इंच रखी गई है, जो तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है। इसके साथ ही निर्माण में कुलापा, ड्रेनेज और सोकपीट जैसी जरूरी व्यवस्थाएं भी शामिल नहीं की गई हैं।
बताया जा रहा है कि पितईबंद माइनर, परसदा डिस्ट्रीब्यूटरी के 170 चेन से शुरू हुई है, जिसकी कुल लंबाई करीब 220 चेन है। यह नहर पितईबंद, पीपरछेड़ी, सेम्हरतरा, परसदा, राजिम, कुम्ही और कोमा गांवों के किसानों के लिए निर्मित की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा कार्य इस प्रकार किया गया है कि पहली बारिश में ही निर्माण पूरी तरह ढह जाएगा। कार्य स्थल पर निर्माण एजेंसी, लागत, तकनीकी स्वीकृति और कार्य अवधि से संबंधित कोई सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जो यह दर्शाता है कि इस करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य में पारदर्शिता पूरी तरह से गायब है।
अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है पहले बनी नहर में पानी का प्रवाह बेहतर था, फिर ड्राइंग डिजाइन में बदलाव करने की क्या जरूरत पड़ी?
क्या डिजाइन परिवर्तन का आदेश देने वाले अधिकारी पर प्रशासन कार्रवाई करेगी? बिना किसानों की सहमति से बदलाव क्यों किया गया?
क्या मुख्यमंत्री साय खुद के विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी?





