खारून नदी में उद्योगों का जहर, बीरगांव की पेयजल आपूर्ति पर गहराता संकट

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।इंदौर में दूषित पानी से हुई 16 मौतों के बावजूद राजधानी रायपुर के जिम्मेदार अफसर अब भी चेतते नजर नहीं आ रहे हैं। कारा स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही है। उरला औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला केमिकल युक्त और अत्यंत जहरीला अपशिष्ट जल बिना किसी शुद्धिकरण के सीधे खारून नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी का पानी धीरे-धीरे ज़हर बनता जा रहा है।

जमीनी हकीकत यह है कि जिस एसटीपी का उद्देश्य दूषित जल को ट्रीट कर नदी में छोड़ना था, वह केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है। बीते कई महीनों से प्लांट की मशीनें बंद पड़ी हैं, फिल्टर सिस्टम पूरी तरह निष्क्रिय है और नालों के ज़रिए गंदा पानी सीधे खारून में प्रवाहित किया जा रहा है। इसके बावजूद नगर निगम रायपुर आंखें मूंदे बैठा है।

 महापौर-आयुक्त का औचक निरीक्षण

मंगलवार को बीरगांव नगर निगम के महापौर नंदलाल देवांगन, निगम आयुक्त युगल किशोर उर्वशा और अधिकारियों की टीम ने कारा स्थित एसटीपी का निरीक्षण किया। मौके पर ट्रीटमेंट टैंकों के आसपास काले रंग का झाग, तीखी बदबू और केमिकल युक्त पानी जमा मिला। कई पाइपलाइनें बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नदी की ओर खुली पाई गईं।

महापौर ने इस स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर आम जनता की सेहत से खिलवाड़ है। उन्होंने तत्काल बिना ट्रीटमेंट पानी को नदी में छोड़े जाने पर रोक लगाने और एसटीपी को जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

 इंटकवेल पर मंडराता खतरा

स्थिति को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि कारा एसटीपी से कुछ ही दूरी पर बीरगांव नगर निगम का इंटकवेल स्थित है, जहां से हजारों घरों को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है। खारून नदी में मिल रहा जहरीला जल भू-जल स्रोत को प्रभावित कर सकता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बीरगांव क्षेत्र में जल जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

इसी आशंका को देखते हुए महापौर और निगम आयुक्त ने बेंद्री स्थित इंटकवेल का भी निरीक्षण किया और जलस्तर, स्वच्छता व सुरक्षा इंतजामों की जांच की। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि किसी भी हालत में दूषित पानी इंटकवेल तक न पहुंचने पाए।

 नगर निगम रायपुर की लापरवाही उजागर

चौंकाने वाली बात यह है कि कारा स्थित एसटीपी का संचालन नगर निगम रायपुर के अधीन है, जबकि इसका सीधा दुष्प्रभाव बीरगांव नगर निगम क्षेत्र पर पड़ रहा है। दोनों निकायों के बीच जिम्मेदारी को लेकर चल रही खींचतान में खारून नदी को प्रदूषण का शिकार बनाया जा रहा है।

 मौके पर मौजूद अधिकारी

निरीक्षण के दौरान एमआईसी सदस्य इकराम अहमद, संतोष साहू, कार्यपालन अभियंता डीएल देवांगन सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने हालात देखे, लेकिन अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि कार्रवाई कब और कितनी सख्ती से होती है।

 दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

महापौर नंदलाल देवांगन ने कहा कि उद्योगों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी बिना ट्रीटमेंट खारून नदी में छोड़ा जाना बेहद गंभीर मामला है। इससे नदी के साथ-साथ बीरगांव की जल आपूर्ति भी खतरे में है। पूरे प्रकरण से रायपुर कलेक्टर को अवगत कराते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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