पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस के भीतर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद शुरू हुआ ‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ अब पार्टी के संसदीय दल तक पहुंचने की चर्चा में है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक कुछ सांसदों के बीच असंतोष गहराता जा रहा है, जिससे संभावित टूट की आशंका जताई जा रही है।
‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ से बढ़ा विवाद
सूत्रों के अनुसार पहले विधानसभा में पार्टी के भीतर 80 में से 58 विधायकों ने कथित तौर पर अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। बागी गुट ने अलग नेतृत्व के तहत खुद को मजबूत करने की कोशिश की, जिससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया।

अब यही असंतोष लोकसभा और राज्यसभा तक फैलने की आशंका जताई जा रही है। लोकसभा में पार्टी के 28 सांसद और राज्यसभा में 13 सांसद मौजूद हैं।
दिल्ली में बढ़ी हलचल, अभिषेक बनर्जी का दौरा अहम
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी अचानक दिल्ली पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि यह दौरा संगठन में बढ़ते तनाव और आगामी बैठकों से जुड़ा हुआ है। साथ ही सोमवार को उन्हें CID के सामने भी पेश होना है, जो फर्जी हस्ताक्षर विवाद से जुड़ा मामला है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी ने स्वयं उन्हें तय समय से पहले दिल्ली भेजा, ताकि हालात की समीक्षा की जा सके।
बागी विधायक का बड़ा दावा
बागी विधायक संदीपन साहा ने दावा किया है कि संसद में भी वही हालात बन रहे हैं जैसे पश्चिम बंगाल विधानसभा में देखने को मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति पार्टी के भीतर नेतृत्व संघर्ष और तानाशाही प्रवृत्ति के कारण उत्पन्न हो रही है।
पार्टी का पलटवार
वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने बगावत की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह सब राजनीतिक अफवाहें हैं। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को कमजोर करने के लिए ‘ऑपरेशन’ जैसी रणनीति चलाई जा रही है।






