नई दिल्ली। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो शनिवार (23 मई, 2026) को अपनी चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे। अमूमन विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या राजनयिक अपनी यात्रा की शुरुआत देश की राजधानी नई दिल्ली से करते हैं, लेकिन रूबियो ने अपनी इस पहली भारत यात्रा का आगाज कोलकाता से किया। कोलकाता पहुंचते ही वे सबसे पहले मदर टेरेसा द्वारा स्थापित संस्था ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के मुख्यालय यानी ‘मदर हाउस’ गए।
14 साल बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का यह पहला कोलकाता दौरा है। इससे पहले साल 2012 में हिलेरी क्लिंटन कोलकाता आई थीं। रूबियो की इस यात्रा और सीधे ‘मदर हाउस’ जाने को लेकर वैश्विक और भारतीय गलियारों में राजनयिक और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल, मदर टेरेसा की यह संस्था पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवादों और जांच के दायरे में रही है।

रूबियो के इस दौरे का कूटनीतिक मायने क्या हैं?
मार्को रूबियो का मिशनरीज ऑफ चैरिटी जाना महज एक सामान्य दौरा नहीं, बल्कि इसे एक बड़े कूटनीतिक और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संदेश (Symbolic Gesture) के रूप में देखा जा रहा है।
- FCRA कानून और अमेरिकी चिंताएं: भारत सरकार द्वारा विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले कानून FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) को कड़ा किए जाने से अमेरिकी राजनीतिक हलके और क्रिश्चियन संगठन चिंतित हैं।
- संपत्ति जब्त होने का डर: हाल ही में अमेरिकी हाउस ग्लोबल ह्यूमन राइट्स सब-कमेटी के अध्यक्ष क्रिस स्मिथ ने आशंका जताई थी कि भारत के नए नियमों के तहत अगर किसी NGO या धार्मिक संस्था का FCRA लाइसेंस लैप्स होता है, तो सरकार उनकी संपत्तियां जब्त कर सकती है। उन्होंने रूबियो से इस मुद्दे को भारत सरकार के सामने उठाने की मांग की थी।
‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ से जुड़े मुख्य विवाद
गरीबों, बीमारों और अनाथों की सेवा के लिए दुनिया भर में मशहूर ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ का इतिहास जितना सेवा भाव से भरा है, उतना ही यह गंभीर विवादों से भी घिरा रहा है। जानिए संस्था से जुड़े प्रमुख विवाद:
1. FCRA लाइसेंस निलंबन और विदेशी फंडिंग पर रोक (2021)
दिसंबर 2021 (क्रिसमस के दिन) को गृह मंत्रालय (MHA) ने कुछ “प्रतिकूल इनपुट्स” का हवाला देते हुए मिशनरीज ऑफ चैरिटी के FCRA लाइसेंस को रिन्यू करने से इनकार कर दिया था। इसके कारण संस्था के विदेशी बैंक खाते फ्रीज हो गए थे और उसे मिलने वाली करोड़ों रुपये की विदेशी फंडिंग रुक गई थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारी विवाद के बाद जनवरी 2022 में केंद्र सरकार ने इसका लाइसेंस बहाल कर दिया था।
2. जबरन धर्मांतरण के आरोप
संस्था पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि वह सेवा की आड़ में लोगों का ‘जबरन या प्रलोभन देकर’ ईसाई धर्म में परिवर्तन कराती है। गुजरात और झारखंड जैसे राज्यों में संस्था के खिलाफ दक्षिणपंथी संगठनों और कुछ स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई जा चुकी हैं, जिसमें यह दावा किया गया था कि आश्रय गृहों में रहने वाले बच्चों और महिलाओं को जबरन ईसाई धर्म की ओर धकेला जा रहा है।
3. बच्चा बेचने का रैकेट (झारखंड, 2018)
साल 2018 में झारखंड के रांची स्थित ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के एक केंद्र (निर्मल हृदय) से नवजात बच्चों को बेचे जाने का एक बड़ा रैकेट सामने आया था। इस मामले में संस्था की एक सिस्टर और एक कर्मचारी को गिरफ्तार भी किया गया था। इस घटना के बाद देश भर में संस्था के सभी बाल गृहों की जांच के आदेश दिए गए थे।
क्या इस दौरे से रिश्तों में आएगी तल्खी?
मार्को रूबियो की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली क्वाड (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेना, रक्षा सहयोग बढ़ाना और व्यापारिक टैरिफ मुद्दों को सुलझाना है। हालांकि, यात्रा की शुरुआत में ही रूबियो द्वारा विवादों में रही इस कैथोलिक संस्था को तवज्जो देना, आगामी बैठकों में भारत सरकार के साथ ‘धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक समाज’ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा का संकेत देता है।







