मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर बाजार से 3,600 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियां जारी कर जुटाई गई इस राशि के बाद चालू वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार की कुल उधारी 12,800 करोड़ रुपये हो गई है। वित्त विभाग के अनुसार 31 मार्च 2026 तक प्रदेश पर 4,88,714.17 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो नई उधारी जुड़ने के बाद 5 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में कुल 1,06,190 करोड़ रुपये सार्वजनिक ऋण जुटाने का प्रावधान किया है। इसमें 78,500 करोड़ रुपये बाजार से उधार लेने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक सरकार इस लक्ष्य का 16.30 प्रतिशत यानी 12,800 करोड़ रुपये उधार ले चुकी है।
इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने मध्य प्रदेश को आर्थिक बदहाली की ओर धकेल दिया है। उनके अनुसार प्रदेश का कुल कर्ज अब 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जो राज्य के वार्षिक बजट से भी ज्यादा है। कमलनाथ का आरोप है कि सरकार की आय का बड़ा हिस्सा कर्ज के ब्याज के भुगतान में खर्च हो रहा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कमलनाथ ने यह भी कहा कि आर्थिक स्थिति गंभीर होने के बावजूद भाजपा सरकार फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने को तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की “पैसा दो–काम लो” नीति और बढ़ते भ्रष्टाचार के कारण प्रदेश कर्ज के दलदल में फंसता जा रहा है।
वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि बजट प्रबंधन और विकास योजनाओं के वित्तपोषण के लिए तय रणनीति के तहत ऋण लिया जा रहा है। हालांकि बढ़ते कर्ज और उस पर सियासी बयानबाजी के बीच प्रदेश की आर्थिक स्थिति एक बार फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गई है।





