रायपुर: नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRANVP) का सड़क नवीनीकरण निविदा विवाद अब सीधे संगठन के शीर्ष तकनीकी अधिकारी यानी चीफ इंजीनियर (CE) बी.आर. अग्रवाल के गले की फांस बनता नजर आ रहा है। स्थानीय ठेकेदारों और ‘बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ ने सीधे तौर पर चीफ इंजीनियर पर अपने चहेतों और कुछ चुनिंदा ‘कृपा पात्र’ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए निविदा में अजीबोगरीब और अव्यावहारिक शर्तें (क्लॉज) डालने का आरोप लगाया है।
एसोसिएशन का दावा है कि इन मनमाने क्लॉज के खेल की वजह से छत्तीसगढ़ सरकार को सीधे तौर पर 30 प्रतिशत का भारी-भरकम वित्तीय नुकसान हो रहा है। मामले की शिकायत अब राज्य के चीफ सेक्रेटरी (मुख्य सचिव) तक पहुंच चुकी है।
30% का नुकसान
शिकायतकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने चीफ इंजीनियर के इस टेंडर खेल का जो गणित सामने रखा है, वह बेहद चौंकाने वाला है. अजीबोगरीब तकनीकी शर्तें लगाने के कारण प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है। चुनिंदा ठेकेदारों ने सिंडिकेट बनाकर टेंडर की दरें सामान्य से 10 से 15 प्रतिशत तक ऊंची (हाई) डाल दी हैं।
यदि यही टेंडर बिना इन अनावश्यक शर्तों के पारदर्शी तरीके से निकाला जाता, तो विभाग के अन्य इंजीनियर और स्थानीय ठेकेदार इसी काम को तय एस्टीमेट से 10 से 15 प्रतिशत कम में करने की क्षमता रखते हैं।
ऊंची दरों और स्थानीय प्रतिस्पर्धा को रोकने के इस दोहरे खेल से छत्तीसगढ़ सरकार को कुल मिलाकर 30% का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बिल्डर्स एसोसिएशन बेहद नाराज, सचिव से शिकायत
चीफ इंजीनियर बी.आर. अग्रवाल की कार्यप्रणाली से बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया में भारी आक्रोश है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस मामले में नाराजगी जताते हुए कई बार लिखित शिकायत दर्ज कराई है। हाल ही में एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल इस पूरे टेंडर घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेजों के साथ सचिव से भी मुलाकात कर चुका है। एसोसिएशन का आरोप है कि कुछ खास कंपनियों पर अधिकारी की विशेष मेहरबानी के कारण राज्य के मूल निवासियों और स्थानीय ठेकेदारों का दम घोंटा जा रहा है।
सुपरसीड होकर बने चीफ इंजीनियर
यह पहला मौका नहीं है जब बी.आर. अग्रवाल विवादों में आए हैं। नवा रायपुर (NRDA) में आने से पहले वे रायपुर नगर निगम में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर पदस्थ थे। बताया जाता है कि निगम में उनके कार्यकाल के दौरान भी कई तरह की वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप उन पर लगे थे। चर्चा है कि नगर निगम रायपुर में ईई के पद पर रहते हुए वे नियमों को ताक पर रखकर, वरिष्ठताओं को लांघते हुए सुपरसीड कर सीधे नवा रायपुर के चीफ इंजीनियर की कुर्सी तक पहुंच गए, जो खुद में एक जांच का विषय है।
विवाद की जड़
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद एनआईटी क्रमांक 42/Road-Renewal/EEC-III/CE/NRANVP/2025-26 के तहत नवा रायपुर की सड़कों के नवीनीकरण (रिनिवल) कार्य से जुड़ा है। इसमें जानबूझकर तीन ऐसी शर्तें जोड़ी गईं जो केवल चुनिंदा बड़ी बाहरी कंपनियों के पास ही उपलब्ध हैं.
- रिनिवल जैसे छोटे काम के लिए कम से कम 4-लेन सड़क निर्माण का पुराना अनुभव मांगना।
- मिलिंग मशीन से प्रोफाइल करेक्शन का पृथक अनुभव या मशीन की ओनरशिप/किरायानामा अनिवार्य करना, जो राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) या राज्य PWD के सामान्य टेंडरों में कभी नहीं मांगा जाता।
- रोड फर्नीचर (जो कि बाजार से खरीदकर लगाया जाता है) का विशिष्ट निर्माता/अनुभव प्रमाण पत्र मांगना।
दबाव में तारीख तो बढ़ी, लेकिन शर्तों पर अड़े
बढ़ते विवाद और स्थानीय ठेकेदारों के कड़े विरोध के बाद विभाग ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए निविदा की अंतिम तिथि को 18.05.2026 से बढ़ाकर 25.05.2026 तो कर दिया है, लेकिन चीफ इंजीनियर ने मूल विवादित शर्तों में कोई संशोधन नहीं किया है। इससे साफ है कि विभाग बैकफुट पर होने के बावजूद चहेती कंपनियों को उपकृत करने की जिद पर अड़ा हुआ है।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर हुई इस शिकायत के बाद क्या इस टेंडर फिक्सिंग के खेल पर रोक लगती है या फिर रसूखदार अफसरों के आगे सरकारी खजाने को 30% का चूना यूं ही लगता रहेगा।





