पश्चिम बंगाल की उबलती सियासत में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का ‘बयानबाजी का जहर’ फैल गया है। पार्टी के युवा लौहपुरुष और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का कथित बयान राजनीतिक हलकों में भूकंप ला चुका है।
उन्होंने गरजते हुए कहा: “मैं personally जिम्मेदारी लूंगा। 4 मई के बाद देख लूंगा दिल्ली से किसके बाप आएंगे बचाने!”
यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विपक्ष ने हमला बोल दिया। भाजपा, कांग्रेस और CPI(M) ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। भाजपा के केंद्रीय नेता और बंगाल प्रभारी सुवेंदु अधिकारी ने तुरंत ट्वीट कर ललकारा: “अभिषेक बनर्जी की गुंडागर्दी अब खुली धमकी में बदल गई! TMC की ‘हिंदू-विरोधी’ सरकार विपक्ष को डराने पर तुली है। केंद्र सरकार इसकी जांच कराए!”
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रियाएं:
भाजपा IT सेल प्रमुख अमित मालवीय ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा: “ममता की ‘भतीजा आर्मी’ अब खुलकर बोल रही है।
क्या यह बंगाल में 1977 जैसा इमरजेंसी का दौर लौट आया?”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा: “यह TMC की फासीवादी मानसिकता है। हम अदालत जाएंगे!”
CPI(M) पॉलिटब्यूरो सदस्य बिमान बोस बोले: “TMC ने बंगाल को गुंडाराज बना दिया। अभिषेक का बयान ममता की असली सोच है।”
TMC की चुप्पी और सफाई का खेल:
सत्ताधारी TMC की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। पार्टी के मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा: “यह पुराना वीडियो है, संदर्भ से हटाकर फैलाया जा रहा। अभिषेक जी ने सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट होने को कहा।” लेकिन विपक्ष इसे ‘झूठी सफाई’ बता रहा। ममता बनर्जी खुद चुप हैं, जो सवाल उठा रहा है—क्या वे अपने भतीजे को ढाल बनाए रखेंगी?
बयान का बैकग्राउंड: क्या है 4 मई का राज?
यह बयान बंगाल में चल रहे राजनीतिक तनाव के बीच आया। 4 मई को TMC की एक बड़ी रैली है, जहां अभिषेक बनर्जी मुख्य वक्ता हैं। विपक्ष का आरोप है कि TMC केंद्र सरकार के खिलाफ ‘आंदोलन’ चला रही। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा: “अभिषेक दिल्ली को ललकार रहे हैं। क्या वे CBI-ED जांच से डर रहे?”
अभिषेक बनर्जी पर भ्रष्टाचार के कई केस चल रहे—स्कूल जॉब घोटाला, भाटपाड़ा हिंसा। ED ने हाल ही में उनकी पूछताछ की। विश्लेषकों का मानना: यह बयान उन जांचों का जवाब है।



