मधुबनी। बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने मिथिलांचल क्षेत्र में एनडीए को टक्कर देने के लिए नई रणनीति तैयार की है। उनकी योजना स्थानीय मुद्दों, रोजगार, शिक्षा और पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण पर केंद्रित है। पार्टी इस रणनीति को “तेजस्वी का तीर” नाम दे रही है, जिसका लक्ष्य मतदाताओं को राजद की ओर आकर्षित करना है।
मिथिलांचल की सीटों पर नजर:
मधुबनी से लेकर समस्तीपुर तक करीब 30 विधानसभा सीटें हैं। राजद अब तक उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं कर पाई है, लेकिन पार्टी अंदरखाने से अपने भरोसेमंद और पुराने चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है।
मधुबनी से पूर्व मंत्री समीर महासेठ, लौकहा से भारत भूषण मंडल, दरभंगा ग्रामीण से ललित यादव, समस्तीपुर से अख्तरुल इस्लाम शाहीन, उजियारपुर से आलोक मेहता, मोहिउद्दीननगर से एज्या यादव, और हायाघाट से भोला यादव के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं।
राजद के भरोसेमंद चेहरे:
समीर महासेठ दो बार विधायक रह चुके हैं और तेजस्वी सरकार में उद्योग मंत्री भी रहे। उनके पिता राजकुमार महासेठ लालू यादव के करीबी और मंत्री रह चुके हैं। वहीं भारत भूषण मंडल लंबे समय से पार्टी से जुड़े हैं और कई बार चुनाव लड़ चुके हैं।
अख्तरुल इस्लाम शाहीन लगातार 2010 से जीतते आ रहे हैं। उन्होंने पहली बार जननायक कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर को हराकर बड़ी जीत दर्ज की थी।
ललित यादव, जो पांच बार विधायक रह चुके हैं, दरभंगा ग्रामीण में राजद का मजबूत चेहरा माने जाते हैं। वहीं, आलोक मेहता, तेजस्वी यादव के सबसे करीबी और रणनीतिक सलाहकारों में शामिल हैं। वे 2004 से 2009 तक सांसद भी रह चुके हैं।
भोला यादव लालू यादव के निजी सहायक और परिवार के विश्वसनीय सदस्य हैं। मोहिउद्दीननगर से एज्या यादव 2015 में विधायक रही हैं और पार्टी की प्रवक्ता भी रह चुकी हैं।
नई पीढ़ी को मौका देने की चर्चा:
राजद अब उन सीटों पर नए, युवा चेहरों को आगे लाने की तैयारी में है, जहां पार्टी को पिछली बार हार का सामना करना पड़ा था। विशेष रूप से सुपौल, मधुबनी, दरभंगा और समस्तीपुर जिलों की सीटों पर संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल, राजद के पास इन 35 में से केवल 7 सीटें हैं। ऐसे में मिथिलांचल की लड़ाई तेजस्वी यादव के लिए बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। राहुल गांधी के साथ उनकी “वोटर अधिकारी यात्रा” इसी क्षेत्र से होकर निकली थी, जिससे संकेत मिलते हैं कि पार्टी इस इलाके को चुनावी केंद्र बनाने जा रही है।



