बिहार चुनाव 2025: अरवल सीट पर चार बार निर्दलीयों की जीत, एक उम्मीदवार ने लगाई थी हैट्रिक

Madhya Bharat Desk
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अरवल (बिहार): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में अरवल जिले की दोनों विधानसभा सीटों—अरवल और कुर्था—पर 11 नवंबर को मतदान होना है। दोनों क्षेत्रों में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अरवल से फिलहाल भाकपा (माले) और कुर्था से राजद के विधायक हैं।

2020 के चुनाव में अरवल सीट से भाकपा (माले) के महानंद सिंह ने भाजपा प्रत्याशी दीपक शर्मा को हराया था। लेकिन इस सीट की सबसे खास बात यह है कि यहां चार बार निर्दलीय प्रत्याशी जीत चुके हैं—जिनमें से एक उम्मीदवार ने तो लगातार तीन बार जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाई थी।

निर्दलीयों का दबदबा रहा है अरवल में

1952 से 2020 तक अरवल विधानसभा में कुल 17 चुनाव हो चुके हैं। 1972 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार रंग बहादुर सिंह ने भाकपा को हराकर जीत हासिल की थी। इसके बाद 1980, 1985 और 1990 में कृष्णानंदन प्रसाद ने लगातार तीन बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल कर इतिहास रचा।
उनकी यह हैट्रिक आज तक कोई नहीं तोड़ सका है।

1952 के पहले चुनाव में भी निर्दलीय प्रत्याशी चंद्रभूषण प्रसाद सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे, जो इस सीट पर निर्दलीयों की मजबूत उपस्थिति का संकेत था।

अरवल सीट का राजनीतिक इतिहास

1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी के गुदानी सिंह विजयी हुए थे। 1957 और 1962 में कांग्रेस के बुधन मेहता ने जीत दर्ज की। 1967 और 1969 में भाकपा के शाह जोहैर विधायक बने।
1977 में जनता पार्टी के बनेश्वर प्रसाद सिंह विजयी हुए।
1995 में जनता दल के रवींद्र सिंह कुशवाहा विधायक बने, जबकि 2000 में राजद के अखिलेश प्रसाद सिंह ने जीत हासिल की।
2005 में दो बार हुए चुनाव में लोजपा के दुलारचंद सिंह विजयी हुए।
2010 में भाजपा के चितरंजन कुमार ने पहली बार यहां से जीत दर्ज की।
2015 में राजद के रवींद्र सिंह कुशवाहा ने भाजपा के खिलाफ वापसी की, और 2020 में भाकपा (माले) के महानंद सिंह ने फिर से भाजपा को हराकर सीट अपने नाम की।

कुर्था सीट पर राजद का वर्चस्व

कुर्था विधानसभा सीट पर राजद का वर्चस्व रहा है।
1952 में भारतीय सोशलिस्ट पार्टी के रामचरण सिंह यादव पहले विधायक बने। 1957 में कांग्रेस के कामेश्वर शर्मा ने जीत हासिल की।
1962 में फिर से रामचरण सिंह यादव प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से विजयी हुए।
1972 में कांग्रेस के रामाश्रय प्रसाद सिंह, और 1977 में शोषित समाज दल के नागमणि ने जीत हासिल की।

1980 में जनता पार्टी के सहदेव प्रसाद यादव और 1985 में फिर नागमणि ने निर्दलीय के रूप में जीत दर्ज की।
1990 और 1995 में जनता दल के मुंद्रिका सिंह यादव और सहदेव प्रसाद यादव विधायक बने।
2000 में राजद के शिव वचन यादव, 2005 में लोजपा की सुचित्रा सिंह,
2010 और 2015 में जदयू के सत्यदेव सिंह,
और 2020 में राजद के बागी कुमार वर्मा विधायक बने।

अरवल विधानसभा में निर्दलीय उम्मीदवारों की ऐतिहासिक सफलता इस बात का संकेत है कि यहां मतदाता दलों से ज्यादा उम्मीदवार की छवि और स्थानीय जुड़ाव को प्राथमिकता देते हैं। वहीं कुर्था में राजद का स्थायी प्रभाव रहा है, जो 2025 के चुनाव में भी निर्णायक साबित हो सकता है।

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