छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) में वाहन आवंटन की व्यवस्था को लेकर अब सीधे अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतों के मुताबिक, निर्धारित कीमत से अधिक महंगे वाहन लगाए जा रहे हैं और कार्यादेश की अवधि पूरी होने से पहले ही वाहन बदल दिए जा रहे हैं। इससे ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, जबकि विभाग पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नियमों के अनुसार मुख्यालय के अधिकारियों के लिए 10 लाख रुपये तक और फील्ड अधिकारियों के लिए 11 लाख रुपये तक के वाहन का प्रावधान है। लेकिन आरोप है कि इस सीमा से ऊपर कीमत वाले वाहन आवंटित किए जा रहे हैं। सवाल यह है कि जब नियम में कीमत की स्पष्ट सीमा तय है, तो अधिकारी उससे अधिक महंगे वाहन किस आधार पर लगवा रहे हैं?
ठेकेदारों का कहना है कि कार्यादेश पूरा होने से पहले वाहन बदलने से उनकी पूंजी दांव पर लग जाती है। वाहन खरीदने, उसका रखरखाव करने और विभागीय जरूरतों के अनुसार तैयार रखने में लगाई गई राशि की वसूली नहीं हो पाती। छोटे ठेकेदारों और वाहन मालिकों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है।
वाहन मालिकों ने सीधे सवाल उठाया है कि यदि नियमों में वाहन की कीमत और कार्यादेश की अवधि तय है, तो उसका पालन करना अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों नहीं मानी जा रही? उनका आरोप है कि मनमाने तरीके से वाहन बदलने और महंगे वाहन लगाने से कंपनी के संसाधनों का दुरुपयोग हो सकता है।
ठेकेदारों और वाहन मालिकों ने मांग की है कि वाहन आवंटन की पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच हो, निर्धारित कीमत सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाए और यदि नियम तोड़े गए हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रभावित ठेकेदारों को हुए नुकसान की भरपाई की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।






