बिलासपुर में चक्रवाती तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए नगर निगम प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद 27 से 29 अक्टूबर तक शहर में भारी बारिश, तेज हवाएं और आंधी-तूफान की आशंका जताई जा रही है। इसके मद्देनजर निगम ने अधिकारियों व कर्मचारियों को तीन दिन लगातार अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान के कारण छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भारी वर्षा का अनुमान है। 29 अक्टूबर को बिलासपुर सहित कुछ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बढ़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना है।
इस बीच नगर निगम ने आपदा से निपटने के लिए जिम्मेदारियों का बंटवारा कर दिया है। कुल 17 अधिकारियों को विभिन्न कार्य सौंपे गए हैं, जिनमें दो नोडल अधिकारी और शहर के सभी आठ जोनों के कमिश्नर शामिल हैं। आयुक्त ने अपर आयुक्त खजांची कुम्हार तथा अधीक्षण अभियंता एसपी साहू को संयुक्त नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
निगम प्रशासन का कहना है कि 27 से 29 अक्टूबर तक नियंत्रण कक्ष 24 घंटे चलेगा। जोन कमिश्नरों को अपने-अपने क्षेत्रों में मुनादी कराने, जलभराव की आशंका वाले इलाकों की पहचान करने और राहत-बचाव के लिए कर्मचारियों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। शहर और आसपास के गांवों के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
पेड़ गिरने की स्थिति में उद्यान विभाग की टीम तुरंत सड़कें साफ करेगी, जबकि बिजली के खंभे या स्ट्रीट लाइट क्षतिग्रस्त होने पर विद्युत विभाग मरम्मत का काम संभालेगा। पेयजल आपूर्ति में रुकावट आने पर टैंकरों की व्यवस्था रखी जाएगी। साथ ही होर्डिंग्स से होने वाले खतरे को देखते हुए उनकी सुरक्षा के उपाय करने और राहत कार्य के लिए जेसीबी व डंपर जैसे उपकरण तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और नगर सेना की टीमों को भी तैयार रखने का दावा किया गया है। प्रशासन का कहना है कि बारिश और तूफान के दौरान किसी भी हादसे की सूचना मिलते ही बचाव दल तत्काल कार्रवाई करेंगे। लोगों से अपील की गई है कि तेज बारिश और तेज हवाओं के समय खुले क्षेत्रों, पेड़ों तथा क्षतिग्रस्त बिजली के तारों के पास न जाएं।






