नई दिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन का पुराना बयान एक बार फिर चर्चा में है। शेषन ने कहा था— “मैं भारत सरकार का मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं हूं, मैं भारत का मुख्य चुनाव आयुक्त हूं।” इसी बयान को लेकर अब मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी दलों और आलोचकों ने तीखा तंज कसा है।
आलोचकों का कहना है कि शेषन के दौर में चुनाव आयोग की पहचान सरकार से स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था के रूप में बनी थी, जबकि आज आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक पक्षधरता के आरोप लगाए जा रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर जनता और विपक्ष को संतोषजनक जवाब देने के बजाय भाजपा और एनडीए के नेता आयोग का बचाव कर रहे हैं।
“कुर्सी संवैधानिक, जवाब राजनीतिक”
विपक्षी नेताओं का तंज है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संवैधानिक है, लेकिन विवाद के समय जवाब चुनाव आयोग की ओर से नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं की ओर से सुनाई देता है। उनका सवाल है कि यदि आयोग पूरी तरह स्वतंत्र है, तो मतदाता सूची, एसआईआर और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े आरोपों का जवाब भाजपा नेता क्यों दे रहे हैं?
सोशल मीडिया पर इसी संदर्भ में टिप्पणी की जा रही है— “शेषन कहते थे– मैं भारत का मुख्य चुनाव आयुक्त हूं। आज सवाल यह है कि ज्ञानेश कुमार किसके सवालों का जवाब दे रहे हैं भारत के मतदाताओं का या सरकार के प्रवक्ताओं का?”
विपक्ष का हमला
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए हैं। विपक्ष ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं और आयोग पारदर्शिता नहीं बरत रहा।






