देशभर में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 8 अप्रैल तक करीब 2.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी रबी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर गेहूं की फसल पर पड़ा है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि आम और लीची जैसी बागवानी फसलें भी इस मार से बच नहीं पाईं। खेतों में तैयार फसलें जहां गिर गईं, वहीं कई जगहों पर ओलों ने सीधे फसल को नुकसान पहुंचाया।
इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने बताया कि 5 अप्रैल को ही अधिकारियों को प्रभावित राज्यों में नुकसान का जायजा लेने और राज्य सरकारों के साथ तालमेल बनाने के निर्देश दिए गए थे।
सरकार की ओर से तीन अलग-अलग विभाग मिलकर नुकसान का आकलन कर रहे हैं। साथ ही राज्यों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे तुरंत सर्वे कर प्रभावित किसानों की स्थिति स्पष्ट करें। कृषि मंत्रियों से भी लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
किसानों के लिए राहत की कोशिशें जारी
संकट के इस दौर में केंद्र सरकार उर्वरकों की सप्लाई को बनाए रखने पर भी जोर दे रही है। मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि किसान को उसकी उपज का सही दाम मिले और खेती पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
भंडार भरे, लेकिन दलहन-तिलहन चुनौती
सरकार के मुताबिक, देश में गेहूं और धान का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन दलहन और तिलहन के मामले में अभी भी आयात पर निर्भरता बनी हुई है। इसी कारण अब नीति का फोकस इन फसलों की पैदावार बढ़ाने पर है, ताकि भारत आत्मनिर्भर बन सके।
कालाबाजारी पर सख्ती, डिजिटल सिस्टम से मदद
खाद और बीज की कालाबाजारी रोकने के लिए हरियाणा और मध्यप्रदेश में एग्रीस्टैक परियोजना का पायलट शुरू किया गया है। इसके तहत किसानों की डिजिटल पहचान बनाई जा रही है, जिससे सरकारी सब्सिडी सीधे उनके खातों में पहुंचेगी और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।



