मुरैना जिले का सबसे बड़ा उद्योग सहकारी शक्कर कारखाना पिछले 13 साल से बंद पड़ा है। इस कारखाने से कभी करीब 25 हजार किसान परिवार और 1500 श्रमिक परिवार जुड़े हुए थे। अब मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने इसे स्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक कमलनाथ ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि कारखाने की बेशकीमती जमीन को 61 करोड़ रुपये के बदले एमएसएमई निगम को सौंप दिया गया है। उनका कहना है कि इस फैसले से क्षेत्र के लोगों के सामने रोजगार और आर्थिक विकास का संकट और गहरा जाएगा।
कमलनाथ ने कहा कि शक्कर कारखाना दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर क्षेत्र के विधायक पंकज उपाध्याय आमरण अनशन पर बैठे हैं और आज उनके अनशन का पांचवां दिन है। उन्होंने कहा कि वे और पूरी कांग्रेस पार्टी इस आंदोलन में विधायक के साथ खड़ी है।
उन्होंने सरकार से कारखाने को स्थायी रूप से बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार करने और किसानों व श्रमिकों के हित में इसे दोबारा शुरू करने की दिशा में कदम उठाने की मांग की।





