रायपुर।शराब घोटाले और उससे जुड़े दूसरे मामलों में गिरफ्तार कारोबारी अनवर ढेबर (Anwar Dhebar) को करीब 28 महीने बाद सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। हालांकि अदालत ने साफ कर दिया है कि जमानत के दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर ही रहना होगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह राहत दी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और रवि शर्मा ने सीलबंद लिफाफे में कुछ दस्तावेज अदालत को सौंपे और मामले को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीलबंद लिफाफे में दी गई सामग्री को जरूरत पड़ने पर न्यायिक प्रशासन देखेगा, लेकिन फिलहाल यह मामला व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है। इसलिए अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत दी जा रही है।
राज्य सरकार ने अदालत से यह भी आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त के अलावा, अनवर ढेबर जिस राज्य में रह रहे हों वहां से अगर किसी दूसरे राज्य या स्थान पर जाएं, तो इसकी जानकारी संबंधित एजेंसियों को देना भी अनिवार्य किया जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह अतिरिक्त शर्त लगाने से इनकार कर दिया।
वहीं, अनवर ढेबर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि यह उनके खिलाफ दर्ज छठा मामला है और उन्हें लगातार अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया जाता रहा है। ऐसे में नई अतिरिक्त शर्त लगाना उचित नहीं होगा।
सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि इस मामले में कोई नई अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जाएगी। हालांकि अन्य मामलों में पहले से लागू सभी शर्तें पहले की तरह प्रभावी रहेंगी। यानी अंतरिम जमानत मिलने के बावजूद उन्हें अदालत के पहले के आदेश के अनुसार छत्तीसगढ़ से बाहर ही रहना होगा।







