रायपुर।छत्तीसगढ़ में बिजली बिल को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है। विपक्ष में रहते हुए वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस सरकार पर बिजली व्यवस्था को लेकर तीखे आरोप लगाए थे। उन्होंने अपने एक पुराने ट्वीट में लिखा था कि “अंधेर नगरी चौपट राजा, बिजली व्यवस्था का बजा दिया बाजा। बिजली बिल हाफ कहा था, बिजली कर दी हाफ, क्या यही है इंसाफ?” साथ ही उन्होंने तत्कालीन सरकार पर बिजली व्यवस्था के कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा था कि भाजपा सरकार के समय राज्य सरप्लस बिजली वाला था, जबकि कांग्रेस शासन में उसकी रेटिंग और रैंकिंग गिर गई।

अब वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में बिजली बिल को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि घरेलू बिजली उपभोक्ताओं से टैक्स और अन्य शुल्क जोड़ने के बाद प्रति यूनिट 12 रुपये से अधिक की प्रभावी दर वसूली जा रही है, जिससे बिजली का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।

सबसे गंभीर आरोप बिलिंग व्यवस्था को लेकर लगाया जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि कई क्षेत्रों में हर महीने के बजाय दो-दो महीने बाद बिजली बिल जारी किए जा रहे हैं। इससे खपत एक साथ जुड़ने के कारण उपभोक्ता उच्च स्लैब में पहुंच जाते हैं और उन्हें पहले की तुलना में काफी अधिक राशि का भुगतान करना पड़ता है। कई उपभोक्ताओं का दावा है कि मार्च के बाद सीधे मई और फिर जुलाई में बिल जारी किए गए, जबकि इस संबंध में शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ।

विपक्ष में रहते हुए विष्णु देव साय ने कहा था कि “अधिकारी-कर्मचारी पैसा लूटें और उनके घोटालों की सजा जनता भुगते।” अब इसी को लेकर सरकार से सवाल पूछा जा रहा है कि क्या वर्तमान बिजली बिल व्यवस्था आम उपभोक्ताओं के हित में है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि दो माह की बिलिंग के कारण उन्हें अधिक स्लैब में डालकर ज्यादा राशि वसूली जा रही है, तो सरकार को तत्काल मासिक बिलिंग सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।







