महानदी जल विवाद: CWC की मध्यस्थता पर बनी सहमति, छत्तीसगढ़ देगा लिखित जवाब

Madhya Bharat Desk
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भुवनेश्वर। महानदी जल विवाद को सुलझाने की दिशा में एक अहम और सकारात्मक पहल सामने आई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने ओडिशा के उस प्रस्ताव पर सहमति जताई है, जिसमें इस विवाद को केंद्रीय जल आयोग (CWC) की मध्यस्थता में बातचीत के जरिए हल करने की बात कही गई थी।

महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (MWDT) में हुई सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार ने अदालत के बाहर आपसी सहमति से इस मामले का समाधान निकालने की इच्छा जताई। ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने भी इस घटनाक्रम की पुष्टि की है।

न्यायाधिकरण ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया है कि वह 23 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई से पहले इस मामले पर अपना रुख लिखित रूप में अदालत के सामने पेश करे।

इस विवाद को बातचीत से सुलझाने की पहल ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने की थी। उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि लंबे समय तक अदालत में मामला चलाने के बजाय दोनों राज्यों के लोगों के हित में बातचीत का रास्ता अपनाया जाए।

इसके अलावा मुख्यमंत्री माझी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल को भी पत्र लिखकर केंद्र सरकार से इस मामले में मध्यस्थता कराने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया में काफी समय लग रहा है, इसलिए बातचीत के जरिए समाधान बेहतर रहेगा।

बता दें कि साल 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (MWDT) का गठन किया गया था। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ ने नदी के ऊपरी हिस्से में बैराज और बांध बनाकर पानी के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया है। इससे खासकर गर्मियों के दौरान राज्य में पानी की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है।

ओडिशा के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के मार्गदर्शन में एक संयुक्त समिति बनाने का भी प्रस्ताव दिया था। इस समिति की अगुवाई केंद्रीय जल आयोग (CWC) करेगा और इसमें दोनों राज्यों के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी शामिल होंगे। समिति लगातार बातचीत के जरिए ऐसा समाधान तलाशेगी, जो दोनों राज्यों के लिए स्वीकार्य और लाभदायक हो।

ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने छत्तीसगढ़ के इस रुख को सकारात्मक कदम बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 23 जुलाई की सुनवाई से पहले छत्तीसगढ़ सरकार अपना लिखित हलफनामा अदालत में दाखिल कर देगी।

गौरतलब है कि महानदी जल विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारी पिछले कई वर्षों में करीब 50 तकनीकी और प्रशासनिक बैठकों में हिस्सा ले चुके हैं।

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