नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में सरकारी काम में बाधा डालने और जातिसूचक टिप्पणियां करने के आरोपी कथित आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता राकेश कुमार बहल को अग्रिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान देश की शीर्ष अदालत ने आरटीआई के दुरुपयोग को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी भी की।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “आप होते कौन हैं?”
15 जून 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पुराने आदेश को बरकरार रखा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरटीआई कार्यकर्ताओं के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा:
“RTI activism अब एक नया धंधा बन गया है। वे (याचिकाकर्ता) सड़क निर्माण की निगरानी करने वाले कौन होते हैं? क्या वे इंजीनियर हैं या कोई उच्च अधिकारी?”
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पंजाब में लगभग ₹57 करोड़ की लागत से चल रही एक सरकारी सड़क निर्माण परियोजना से जुड़ा है। राकेश कुमार बहल और उनके सहयोगी राजीव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने:
- सरकारी लोक सेवकों (Public Servants) के काम में बाधा डाली।
- ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों के साथ मारपीट/हमला किया।
- अधिकारियों पर जातिसूचक टिप्पणियां (SC/ST एक्ट के तहत) कीं।
इस मामले में पुलिस ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों आरोपियों ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सहयोगियों को भी नहीं मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ राकेश कुमार बहल बल्कि उनके सहयोगी राजीव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका को भी सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब दोनों आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में आरटीआई की आड़ में ब्लैकमेलिंग या सरकारी कामों में अड़ंगा लगाने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है।





