छत्तीसगढ़ में मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ने से लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ रहा है। मानसून की देश में एंट्री हुए 11 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन छत्तीसगढ़ समेत 17 राज्यों में अब तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। इससे किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 4 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि में औसतन 53.7 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, जबकि केवल 19.2 मिमी बारिश हुई है।
मौसम विभाग की सैटेलाइट तस्वीरों में भी चिंताजनक स्थिति सामने आई है। आमतौर पर जून के मध्य तक मध्य भारत और छत्तीसगढ़ का बड़ा हिस्सा घने मानसूनी बादलों से ढका रहता है, लेकिन इस बार अधिकांश क्षेत्र साफ और सूखे दिखाई दे रहे हैं। मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास ठहर गया है, जिसके कारण छत्तीसगढ़ में इसकी प्रगति प्रभावित हुई है।
आईएमडी के रेनफॉल डिपार्चर मैप में छत्तीसगढ़ सहित मध्य भारत के कई हिस्सों को पीले और लाल रंग से दर्शाया गया है, जो सामान्य से काफी कम बारिश का संकेत है। यदि जल्द ही मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो धान की बुआई और खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में बंगाल की खाड़ी में मौसम प्रणाली बनने पर मानसून फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। फिलहाल प्रदेश के किसान और आम नागरिक अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।







