प्रदेश में 1 जून से शुरू हुई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को लेकर अब सियासत तेज हो गई है। तकनीकी खामियों और विभागीय तैयारियों की कमी के कारण पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है।
राजस्व विभाग का पोर्टल अब तक सही तरीके से काम नहीं कर रहा है, जिससे कर्मचारियों के आवेदन फॉर्म जमा नहीं हो पा रहे हैं। वहीं जनजातीय विभाग में स्थिति और भी उलझी हुई है, जहां पोर्टल पर रिक्त पदों की जानकारी ही नहीं दिखाई दे रही। कई जगह ‘शून्य (0) पद’ दर्शाए जा रहे हैं, जबकि कर्मचारियों से 15 विकल्प भरने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिसे कर्मचारी अव्यवहारिक बता रहे हैं।
इसी मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि तबादला नीति के नाम पर प्रदेश में अव्यवस्था फैलाई जा रही है और ऑनलाइन प्रक्रिया केवल दिखावा बनकर रह गई है।
कमलनाथ का आरोप है कि एक तरफ सरकार डिजिटल व्यवस्था और पारदर्शिता की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहे हैं और कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविकता में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं दिख रही और कर्मचारियों का शोषण हो रहा है।
उनका कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद खराब है। कर्मचारियों को न तो सही जानकारी मिल रही है और न ही आवेदन करने में आसानी हो रही है।
इस पूरे मामले ने प्रदेश की तबादला नीति और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





