बालोद में जल संरक्षण की अनोखी पहल, 600 से ज्यादा “बोरी बंधान” बनाकर वन विभाग ने पार किया लक्ष्य

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

बालोद। लगातार गिरते भू-जल स्तर और बढ़ती गर्मी के बीच बालोद वन विभाग ने जल संरक्षण की दिशा में अभिनव पहल शुरू की है। “जल संचय जन भागीदारी अभियान” और “नीर चेतना अभियान” के तहत जिलेभर में “बोरी बंधान” बनाकर वर्षा जल को सहेजने का काम किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस अभियान में बेकार और अनुपयोगी बोरियों का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण दोनों उद्देश्यों को एक साथ साधा जा रहा है।

गुरुवार शाम बालोद-दल्लीराजहरा मार्ग स्थित दहिहान मोड़ के पास शिव मंदिर के नजदीक वन कक्ष क्रमांक आरएफ-96, रामनगर बीट में डीएफओ अभिषेक अग्रवाल की मौजूदगी में बोरी बंधान निर्माण कार्य किया गया।

क्या है बोरी बंधान मॉडल?

वन विभाग पुराने और अनुपयोगी बोरों में मिट्टी और मुरुम भरकर छोटे-छोटे नालों और जल धाराओं में अवरोध तैयार कर रहा है। इससे बारिश के पानी का तेज बहाव रुकता है और पानी धीरे-धीरे जमीन में समाहित होता है। इससे मिट्टी का कटाव कम होता है और भू-जल स्तर सुधारने में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल कम लागत वाला, पर्यावरण अनुकूल और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद प्रभावी साबित हो रहा है। जहां बड़े जल संरचनाओं में भारी बजट और समय लगता है, वहीं बोरी बंधान कम संसाधनों में त्वरित परिणाम दे रहा है।

500 का लक्ष्य, 600 से ज्यादा बंधान तैयार

वन विभाग ने शुरुआती चरण में जिलेभर में 500 बोरी बंधान बनाने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन अभियान को मिल रहे जनसमर्थन और सकारात्मक परिणामों के चलते अब तक 600 से अधिक बोरी बंधान तैयार किए जा चुके हैं। यह कार्य बालोद, डौंडी, डौंडीलोहारा, दल्लीराजहरा और गुरुर वन परिक्षेत्रों में तेजी से जारी है।

वन अधिकारियों का कहना है कि इन बंधानों से आसपास के क्षेत्रों में मिट्टी की नमी बढ़ रही है, जिससे प्राकृतिक रूप से पौधों का पुनर्जनन बेहतर हो रहा है और हरियाली को बढ़ावा मिल रहा है।

जनभागीदारी से जल संरक्षण का संदेश

डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि शासन के निर्देश और कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले में “नीर चेतना अभियान” चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों को भी पानी बचाने की मुहिम से जोड़ना है। इसी सोच के तहत सामाजिक संगठनों, ग्रामीणों और प्रेस क्लब की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि वेस्ट बोरियों का सदुपयोग कर मिट्टी और मुरुम भरकर नालों में अवरोध बनाए जा रहे हैं, जिससे पानी का वेग कम होता है, मिट्टी का क्षरण रुकता है और जंगलों के पुनर्जनन को फायदा मिलता है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment