मातृ-शिशु अस्पताल बालोद की बड़ी लापरवाही: आठ महीने इलाज किया, डिलीवरी के वक्त बोला- किट नहीं है

Madhya Bharat Desk
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बालोद जिले के मातृ-शिशु जिला अस्पताल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारी और संवेदनशीलता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला का पिछले आठ महीनों से इसी अस्पताल में इलाज चल रहा था, उसी महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद “सुरक्षा किट” और अलग डिलीवरी ओटी नहीं होने की बात कहकर रायपुर रेफर कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, ग्राम पैरी की रहने वाली महिला की गर्भावस्था के दौरान सभी जांच और इलाज बालोद के मातृ-शिशु अस्पताल में ही हो रहे थे। अस्पताल प्रबंधन को महिला की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, यहां तक कि उसके एचआईवी संक्रमित होने की जानकारी भी पहले से थी।

रेफर करने की जल्दबाजी पर सवाल

परिजनों के अनुसार, महिला को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के तुरंत रायपुर भेज दिया गया। प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को करीब 100 किलोमीटर दूर रेफर करना काफी जोखिम भरा साबित हो सकता था। आरोप है कि इस दौरान महिला को अस्पताल की सीढ़ियों पर बैठकर इंतजार भी करना पड़ा।

परिजनों और मितानिनों का कहना है कि उन्हें लगातार भरोसा दिलाया गया था कि डिलीवरी के समय अस्पताल में सभी जरूरी इंतजाम उपलब्ध रहेंगे। लेकिन बुधवार को जब महिला प्रसव पीड़ा के साथ अस्पताल पहुंची, तो शुरुआती जांच के बाद अचानक स्टाफ ने डिलीवरी कराने से मना कर दिया। अस्पताल की तरफ से कहा गया कि पीपीई किट और जरूरी सुरक्षा सामग्री उपलब्ध नहीं है, साथ ही अलग ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था भी नहीं है।

मितानिनों में नाराजगी

गांवों में मितानिनें लगातार महिलाओं को अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित करती हैं, लेकिन इस घटना के बाद उनके भरोसे पर भी असर पड़ा है। गुंडरदेही ब्लॉक मितानिन संघ की अध्यक्ष सारिका मेहर ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब महिला का इतने महीनों से इलाज यहीं चल रहा था, तो आखिरी समय में संसाधनों की कमी बताकर रेफर करना गैरजिम्मेदाराना रवैया है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब महिला का पूरा इलाज इसी अस्पताल में किया जा रहा था, तो डिलीवरी के समय जरूरी किट और संसाधनों की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए तय प्रोटोकॉल होते हैं और जिला अस्पतालों में ऐसी स्थिति से निपटने की तैयारी रहना जरूरी माना जाता है।

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