“सरकारी अस्पताल की लापरवाही से गई मासूम की जान: इलाज के बिना लौटाया गया परिजन”

Madhya Bharat Desk
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स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी समाज की रीढ़ होती हैं। जब इन्हीं सेवाओं में लापरवाही देखने को मिलती है, तो आम नागरिक की जान खतरे में पड़ जाती है। जांजगीर-चांपा जिले की घटना इसका दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है, जहां एक मासूम की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि अस्पताल ने समय पर इलाज नहीं किया।

घटना का विवरण:

यह दुखद घटना 4 अगस्त 2025 को बीडीएम अस्पताल, जांजगीर-चांपा में घटी। 22 माह के मासूम आयुष देवांगन को सांप ने काट लिया था। परिजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम मौजूद होने के बावजूद, वहां की नर्सों ने लापरवाही दिखाई और बच्चे को गंभीरता से नहीं लिया। बिना इलाज किए ही उसे निजी अस्पताल ले जाने की मौखिक सलाह दे दी गई।

परिजनों की पीड़ा:

परिजनों का कहना है कि जब वे शुक्रवार देर शाम अस्पताल पहुंचे तो वहां की नर्सों ने इलाज करने से मना कर दिया। उन्होंने यह कहकर लौटा दिया कि बच्चे को किसी अच्छे निजी अस्पताल में ले जाएं। अस्पताल में इलाज की व्यवस्था होने के बावजूद यह रवैया केवल लापरवाही नहीं, अमानवीयता की मिसाल है।

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