रायपुर। राजधानी के एम्स रायपुर में इलाज व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। लिवर फेल्योर से जूझ रहे एक मरीज को अस्पताल में भर्ती करने के बजाय आंबेडकर अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मरीज की गंभीर हालत, फिर भी नहीं मिला तुरंत इलाज
बोरियाखुर्द निवासी भरत गोस्वामी लंबे समय से लिवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। परिजनों के अनुसार, उनकी हालत अचानक बिगड़ने पर वे रात करीब 8 बजे उन्हें एम्स लेकर पहुंचे थे।
परिजनों का आरोप है कि वहां डॉक्टरों ने मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया और बेड खाली न होने की बात कही। इसके बाद रात करीब 9 बजे मरीज को एम्स की एंबुलेंस से आंबेडकर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
एंबुलेंस में घंटों इंतजार, फिर भर्ती
परिजनों ने बताया कि आंबेडकर अस्पताल पहुंचने के बाद भी स्थिति आसान नहीं रही। मरीज को अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में ही करीब डेढ़ से दो घंटे तक रखा गया। इस दौरान एंबुलेंस का एक स्टाफ भी कहीं चला गया था।
काफी मशक्कत के बाद मरीज को ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया, लेकिन तब तक हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी।
इलाज के दौरान मौत
गुरुवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे इलाज के दौरान मरीज ने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर एम्स में इलाज शुरू हो जाता, तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
परिजनों के मुताबिक, लिवर फेल्योर के कारण मरीज के शरीर के कई अंगों पर असर पड़ चुका था और किडनी व ब्रेन भी प्रभावित हो चुके थे।
एम्स की रेफरल व्यवस्था पर पहले भी सवाल
एम्स रायपुर से मरीजों को रेफर किए जाने का मामला पहले भी चर्चा में रहा है। यह मुद्दा संसद में भी उठ चुका है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में इस पर सवाल उठाया था।
तब केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने जानकारी दी थी कि रोजाना औसतन 17 से ज्यादा मरीजों को रेफर किया जाता है। साथ ही यह भी कहा गया था कि कुछ मरीजों को निजी अस्पतालों में भी भेजा जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ माना जाता है।
पहले भी लापरवाही के आरोप
एम्स की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। इसी साल प्रसिद्ध साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल के इलाज के दौरान भी लापरवाही के आरोप लगे थे, जिसके बाद परिजनों ने नाराजगी जताई थी। बाद में उनका निधन भी एम्स में ही हुआ था।
संस्थान की छवि और रिपोर्ट में गिरावट
राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) की रिपोर्ट में भी एम्स रायपुर की छवि और परसेप्शन को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, परसेप्शन इंडिकेटर में संस्थान को केवल 20.62 अंक मिले हैं।
जानकारों का मानना है कि बार-बार मरीजों के रेफर किए जाने और इलाज को लेकर उठ रहे सवालों का असर संस्थान की ब्रांड वैल्यू और विश्वसनीयता पर पड़ रहा है। रिसर्च और पब्लिकेशन के क्षेत्र में भी प्रदर्शन कमजोर बताया गया है।







