बलरामपुर।गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान बज रहे तेज डीजे की आवाज के बीच स्कूल में कक्षा 2 की छात्रा वैष्णवी तिवारी की तबीयत बिगड़ने और बाद में मौत के मामले ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। घटना के बाद पुलिस ने डीजे संचालक और ऑपरेटर को गिरफ्तार कर लिया है। डीजे लगी पिकअप, साउंड सिस्टम और उससे जुड़े उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, डिवाइन पब्लिक स्कूल के प्रबंधक की शिकायत पर कोतवाली नगर थाने में मामला दर्ज किया गया। आरोपियों की पहचान बालाजी हाईटेक डीजे के संचालक चंद्र प्रकाश वर्मा और ऑपरेटर रामपाल सैनी के रूप में हुई है। स्थानीय स्तर पर निगरानी में लापरवाही के आरोप में मेवालाल चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया है, जबकि नगर कोतवाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
बताया जा रहा है कि गणेश विसर्जन जुलूस स्कूल के पास से गुजर रहा था। इसी दौरान तेज आवाज में डीजे बज रहा था और स्कूल की खिड़कियों के शीशे तक कंपन कर रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, बच्ची अचानक अपनी सीट से उठी, असहज हुई और गिर पड़ी। कुछ देर बाद उसने संभलने की कोशिश की, लेकिन फिर बेहोश होकर गिर गई। CCTV फुटेज में घटना का दृश्य सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों में परिवार और स्कूल प्रबंधन ने तेज आवाज को जिम्मेदार बताया है।
यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि उन आयोजकों, डीजे संचालकों और प्रशासनिक अधिकारियों से भी सवाल पूछती है, जो नियमों को कागज पर तो लिख देते हैं, लेकिन जमीन पर उनका पालन नहीं कराते। ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ नियम पहले से मौजूद हैं। रात 10 बजे के बाद डीजे और लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध है, जबकि दिन के समय भी निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजाना नियमों के दायरे में आता है।
बलरामपुर में बच्ची की मौत के बाद नगर क्षेत्र में तेज और तीव्र आवाज वाले डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग उठ रही है।
लेकिन सवाल यह है कि प्रशासन पहले क्यों नहीं जागा? क्या कार्रवाई के लिए हर बार किसी बच्चे के गिरने, किसी बुजुर्ग के बीमार पड़ने या किसी मरीज की हालत बिगड़ने का इंतजार किया जाएगा? किसी कानून को प्रभावी बनाने के लिए 50 मौतों का इंतजार नहीं किया जा सकता। एक मासूम की जिंदगी भी व्यवस्था को जगाने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए।






