मध्यप्रदेश के शिक्षकों के हितों की रक्षा में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य बनाने वाले विवादास्पद फैसले के खिलाफ दायर रिव्यू याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई तय कर दी।


कोर्ट ने याचिका सहित संबंधित आवेदनों को स्वीकार कर 13 मई को दोपहर 2 बजे ओपन कोर्ट में मामले को सूचीबद्ध करने का आदेश जारी किया। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अनुमति अधीन होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शासन ने 17 अप्रैल को यह पुनर्विचार याचिका दायर की थी।
TET फैसले ने राज्य के हजारों शिक्षकों की नौकरी और भविष्य पर संकट ला दिया था, क्योंकि कई योग्य शिक्षक परीक्षा पास नहीं कर पाए। फैसले के बाद विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सीएम आवास जाकर स्थिति से अवगत कराया। डॉ. यादव ने तत्काल आश्वासन दिया कि सरकार शिक्षकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेगी। उन्होंने कहा, “शिक्षक हमारे समाज के निर्माणकर्ता हैं। हम उनके अधिकारों की पूरी मजबूती से रक्षा करेंगे। न्यायालय में तथ्य रखे जाएंगे और न्याय सुनिश्चित होगा।”
यह कदम राज्य सरकार की शिक्षक कल्याण नीति का हिस्सा है। पिछले वर्षों में भर्ती प्रक्रियाओं में TET को वैकल्पिक बनाने के प्रयास हो चुके हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इसे अनिवार्य ठहराया। अब रिव्यू सुनवाई से शिक्षकों के पक्ष को विस्तार से रखने का मौका मिलेगा। संगठनों का मानना है कि अनुभव और योग्यता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
शिक्षाविदों का कहना है कि TET जैसी परीक्षाएं मानक तय करती हैं, लेकिन स्थानीय संदर्भों में लचीलापन जरूरी। सरकार को उम्मीद है कि न्यायिक पुनर्विचार से शिक्षकों को राहत मिलेगी। यह मामला न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बनेगा।



