मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में विजयादशमी के दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। इस हादसे में एक ट्रैक्टर नदी में गिर गया था, जिसमें सवार 11 लोगों की मौत हो गई थी। सरकार ने तुरंत राहत की घोषणा करते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए और घायलों को डेढ़ लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का वादा किया था।
घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं पांडल फाटा पहुंचे और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने सांत्वना देने के साथ एक-एक लिफाफा परिजनों को सौंपा। परिजन यह समझ बैठे कि इनमें मुआवजे के चेक हैं, लेकिन जब उन्होंने घर जाकर लिफाफा खोला तो अंदर 4 लाख रुपए का चेक नहीं बल्कि SDM द्वारा जारी राशि स्वीकृति पत्र निकला। इससे पीड़ित परिवारों में गहरा आक्रोश फैल गया।
मामला यहीं नहीं थमा। प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने भी घायलों को अस्पताल में लिफाफे दिए। लोगों को उम्मीद थी कि यह लिफाफे मुआवजे के 1.5 लाख रुपए के चेक होंगे, लेकिन जब इन्हें खोला गया तो अंदर मात्र 5000 रुपए के चेक मिले, जो किसी भी सरकारी घोषणा का हिस्सा नहीं थे। बाद में बताया गया कि यह राशि केवल तत्कालिक सहायता के लिए दी गई थी, ताकि घायल अपना शुरुआती खर्च वहन कर सकें।
सरकार की ओर से कहा गया कि बड़ी राशि सीधे खातों में भेजी जाएगी, लेकिन इस पूरे मामले ने प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री और मंत्री के ‘लिफाफा वितरण’ वाले इस घटनाक्रम को लेकर जनता में असंतोष है।
घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए व घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की घोषणा की थी। इस प्रकार प्रत्येक मृतक के परिवार को कुल 6 लाख रुपए मिलने की घोषणा हुई, लेकिन ज़मीनी हकीकत में अभी तक परिजनों को चेक प्राप्त नहीं हुए हैं।
यह पूरा प्रकरण दिखाता है कि घोषणाएं और धरातल की सच्चाई में कितना बड़ा अंतर है। पीड़ित परिवार अब भी वास्तविक मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे हैं और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।



