कमलनाथ का धमाका: ‘भाजपा दोमुंहा’, e-uparjan डाउन से गेहूं किसान परेशान

Madhya Bharat Desk
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भोपाल, 10 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की शुरुआत बुरी तरह से फेल हो गई। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभागों में पहले ही दिन e-uparjan पोर्टल का सर्वर डाउन हो गया, जिससे किसानों को स्लॉट बुकिंग में भारी दिक्कत हुई। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे भाजपा सरकार की नाकामी बताते हुए तीखा हमला बोला और कहा कि पार्टी का दोमुंहा चरित्र किसानों के सामने उजागर हो गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में कलेक्टरेट का घेराव कर विरोध दर्ज किया।

कमलनाथ ने अपने बयान में कहा, “प्रदेश का किसान अच्छी तरह से पहचान गया है कि भाजपा का चरित्र दोमुंहा है। चुनाव के समय घोषणा करते समय भाजपा कहती है कि गेहूं का एमएसपी 2700 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाएगा। लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा बढ़ा हुआ एमएसपी देना तो दूर, पुराने एमएसपी पर खरीद करने के लिए भी किसान को तरसा देती है।”

एक महीने की देरी और अब तकनीकी खामियां
प्रदेश में गेहूं खरीदी करीब एक महीने की देरी से शुरू हुई। केंद्र सरकार द्वारा घोषित एमएसपी पर खरीदी का वादा करने वाली भाजपा सरकार ने किसानों को लंबा इंतजार कराया। अब जब कुछ संभागों में उपार्जन प्रक्रिया चली, तो पहले दिन ही e-uparjan पोर्टल क्रैश हो गया। किसानों को ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग न होने से मंडियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। इंदौर जिले के एक किसान रामस्वरूप ने बताया, “हम सुबह से स्लॉट बुक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सर्वर काम ही नहीं कर रहा। फसल खराब होने का डर सता रहा है।”
भोपाल संभाग में सैकड़ों किसान प्रभावित हुए, जबकि उज्जैन और नर्मदापुरम में भी यही हाल रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि पोर्टल पर अपर्याप्त सर्वर क्षमता और तैयारी की कमी इसका कारण है।

कांग्रेस का आक्रामक रुख

कमलनाथ ने आगे कहा, “किसानों को गेहूं खरीद के पहले दिन ही भारी संकटों का सामना करना पड़ा है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि हीला-हवाली छोड़कर गंभीरता से गेहूं का उपार्जन करें। किसानों की समस्या दूर करने के लिए कांग्रेस पार्टी हर स्तर पर सहयोग और संघर्ष करने के लिए तैयार है।”
कांग्रेस ने全省 में प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। छिंदवाड़ा, जबलपुर और ग्वालियर जैसे जिलों में भी कलेक्टरेट घेराव हुए। पार्टी का दावा है कि यह किसान आंदोलन का रूप ले सकता है।

भाजपा सरकार पर सवाल

पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने किसान कल्याण के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद एमएसपी लागू करने में टालमटोल बरता। विपक्ष का आरोप है कि निजी खरीद को बढ़ावा देकर सरकारी खरीदी कमजोर की जा रही है। किसान संगठन ‘भारतीय किसान यूनियन’ ने भी कमलनाथ के बयान का समर्थन किया और तत्काल पोर्टल सुधार की मांग की।

सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन खाद्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, सर्वर को ठीक करने का प्रयास जारी है। किसान नेता सुरेश पटेल ने चेतावनी दी, “यदि समस्या नहीं सुलझी तो आंदोलन तेज होगा।”

यह घटना मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए झटका है, जहां गेहूं प्रमुख फसल है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि देरी से किसानों को करोड़ों का नुकसान हो सकता है।

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