मध्यप्रदेश सरकार ने 25 अप्रैल को तीन प्रमुख निगमों में अहम राजनीतिक नियुक्तियां करते हुए सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन, महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड और राज्य वन विकास निगम में किए गए ये बदलाव महज प्रशासनिक नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
सरकार ने भिंड के भाजपा नेता संजीव कंकर को स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल दो वर्ष का रहेगा। माना जा रहा है कि राशन वितरण प्रणाली में सुधार के साथ-साथ जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम होगी।

वहीं, पूर्व संगठन मंत्री केशव भदौरिया को महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया है। इस नियुक्ति को ओबीसी वर्ग, खासकर युवाओं को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जहां स्किल डेवलपमेंट और रोजगार पर विशेष फोकस रहेगा।

पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को राज्य वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके अनुभव का उपयोग वन संरक्षण के साथ-साथ वन उत्पाद आधारित व्यापार को बढ़ावा देने में किया जाएगा। साथ ही मालवा-चंबल क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास भी माना जा रहा है।

राजनीतिक संदेश साफ
इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा ने क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन साधने की कोशिश की है। चंबल और मालवा क्षेत्र के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने के साथ ओबीसी और सामान्य वर्ग दोनों को साधने का प्रयास नजर आता है। साथ ही, लंबे समय से सक्रिय लेकिन पद की प्रतीक्षा कर रहे नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठन के भीतर असंतोष कम करने की भी रणनीति है।
2027 की तैयारी शुरू
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ये कदम 2027 विधानसभा चुनाव से पहले “पॉलिटिकल रिचार्ज” के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल, जमीनी नेटवर्क की मजबूती और सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में यह एक अहम पहल है।
जहां भाजपा इसे विकास और सुशासन की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इन नियुक्तियों को राजनीतिक पुनर्वास और संस्थाओं के ‘पार्टीकरण’ के रूप में पेश कर सकता है।
स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में चुनावी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है।



