लद्दाख में पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और चीन की सीमा पर हो रहे अतिक्रमण का मुद्दा उठाने वाले सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया है। वे पिछले 17 दिनों से अनशन पर बैठे थे और लगातार शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे थे।
इसी दौरान, 24 सितंबर को Gen-Z का प्रदर्शन उग्र हो गया और इसमें चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। सवाल उठ रहा है कि इस हिंसा के पीछे किसका हाथ था, लेकिन सोनम वांगचुक ने हमेशा खुद को हिंसा से अलग बताया है। उनका कहना है कि वे केवल शांतिपूर्ण तरीके से लद्दाख की आवाज़ उठाते रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों से सोनम वांगचुक पर विदेशी फंड लेने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह फंड किसी भी अवैध स्रोत से नहीं था। उनके मुताबिक, “knowledge partner” के तौर पर कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने उनकी फाउंडेशन को फीस दी थी, जिस पर सरकार ने बाकायदा टैक्स भी लिया। यही सवाल दो साल पहले भी उठा था और उस समय भी उन्होंने तथ्यों के साथ जवाब दिया था।
लेकिन इस बार माहौल अलग है। दो सालों में पहली बार देश लद्दाख की आवाज़ को गंभीरता से सुन रहा था, और इसी बीच सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने पूरे आंदोलन को नई दिशा दे दी है।







