पूरा छत्तीसगढ़ पानी की कमी से जूझ रहा है खासकर आदिवासी और नक्सल प्रभावित इलाके जहां लोग गंदा पानी पीने के लिए मजबूर है। 2024-25 में राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए 3000 करोड़ का अग्रिम राज्यांश जारी किया था जिसका 50-50 प्रतिशत केंद्र और राज्य सरकार दोनों को देने थे यानी राज्य को 1500 करोड़ और केंद्र को 1500 करोड़ कुल खर्च किए जाने थे।
मध्यभारत परिदृश्य से जल जीवन मिशन के अधिकारी ओमकार चंद्रवंशी से बातचीत होने पर उन्होंने जानकारी दी कि केंद्र ने अप्रैल 2026 में 536.53 करोड़ की जो राशि जारी किया है वह इसी की प्रतिपूर्ति के लिए जारी किया है और अभी प्रतिपूर्ति के लिए 963.67 करोड़ रुपए का ओवरबिल बाकी है।
उन्होंने कहा कि राज्य के पास अभी जल जीवन मिशन के कार्यों के लिए कोई राशि नहीं है यानी साफ है छत्तीसगढ़ के लोगों को और ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष ही करना होगा उनको अभी भी गंदा पानी पीकर ही अपना जीवन व्यतीत करना होगा।
आरोप लग रहे है कि पूर्व मिशन में जो कार्य हुए है उसमें मल्टी विलेज के चुनिंदा ठेकेदारों को जरूरत से ज्यादा भुगतान किया गया जिससे ओवरबिल बना है और उसका अभी तक प्रतिपूर्ति किया जा रहा है। लगता है अधिकारियों और ठेकेदारों को ज्यादा पैसा बांट दिए गए है तभी तो 3000 करोड़ की राशि लगने के बावजूद अभी तक गांवों में नल तक नहीं पहुंच पाया है और इस भीषण गर्मी में पूरे छत्तीसगढ़ में पानी की किल्लत मची हुई है। प्रदेश में कहीं पानी नहीं पहुंच पा रहा तो कहीं लोग गंदा पानी पीने को मजबूर है।
परेशान ग्रामीण PHE मंत्री और उपमुख्यमंत्री अरुण साव से भी जवाब मांग रहे है कि मिशन में इतने करोड़ रुपए खर्च किए गए है पर खर्च कहां किए गए है मंत्री जवाब दे। पूर्व में मिशन के अंदर जो अधूरे काम हुए हैं वह भी खराब होने की स्थिति में है तो क्या उनकी क्षतिपूर्ति उन अधिकारियों और ठेकेदारों द्वारा की जाएगी जिनको जरूरत से ज्यादा भुगतान किया गया है। अब सवाल यही उठता है कि आखिर ग्रामीणों को कब तक पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?


