“स्टेडियम में गूंजा इतिहास—राजा रघुराज सिंह की प्रतिमा ने बढ़ाया बिलासपुर का मान”

Madhya Bharat Desk
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बिलासपुर शहर के हृदय में स्थित रघुराज स्टेडियम आज उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दानवीर गोंड़ राजा रघुराज सिंह जगत की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। लंबे समय से प्रतीक्षित यह आयोजन न केवल शहर के लोगों के लिए गर्व का पल रहा, बल्कि बिलासपुर के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय भी जुड़ा।

रघुराज स्टेडियम की कहानी अपने आप में अद्वितीय है। पंडरिया जमींदारी के राजा रघुराज सिंह जगत ने वर्ष 1958 में बिलासपुर शहर के मध्य स्थित लगभग 5 एकड़ मूल्यवान भूमि को खेल गतिविधियों के विकास के लिए उदारतापूर्वक दान कर दिया था। उनके इस निस्वार्थ योगदान ने न केवल शहर में खेलों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सपनों का एक विशाल मंच भी उपलब्ध कराया। इसी धरातल पर खड़ा यह स्टेडियम आज भी खेल और युवा विकास का केंद्र बना हुआ है।

मुख्यमंत्री के अनावरण कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में खिलाड़ी, बच्चे और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और अपने उत्साह व खेल भावना को प्रदर्शित किया। स्टेडियम में वर्षों से क्रिकेट सहित कई इंडोर और आउटडोर खेल प्रतियोगिताएं होती रही हैं, जिसने इसे क्षेत्र में एक प्रमुख खेल केंद्र के रूप में स्थापित किया है। कई रणजी ट्रॉफी मुकाबलों का आयोजन भी इसी मैदान में किया जा चुका है, जो इसकी गरिमा और खेल महत्व को और भी मजबूत बनाता है।

वर्तमान में फिजिकल कल्चरल सोसायटी इस स्टेडियम की देखरेख एवं प्रबंधन का दायित्व संभाल रही है। उनकी सतत कोशिशों के चलते रघुराज स्टेडियम आज भी खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों के लिए समान रूप से उपयोगी और प्रेरणादायी स्थान बना हुआ है। राजा रघुराज सिंह की स्थापित प्रतिमा अब इस स्थान की ऐतिहासिक विरासत को और अधिक जीवंत करती है, मानो यह प्रतिमा हर आगंतुक को उनके योगदान, त्याग और दूरदृष्टि की याद दिलाती हो।

इस भव्य अनावरण ने न केवल राजा रघुराज सिंह के महान योगदान को अमर कर दिया, बल्कि बिलासपुर के नागरिकों के मन में भी अपनी सांस्कृतिक और खेल विरासत के प्रति सम्मान को नई ऊर्जा प्रदान की है। यह प्रतिमा आने वाले समय में युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्तंभ बनेगी और बिलासपुर के खेल इतिहास को एक नई पहचान देगी।

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