गरीब की झोपड़ी पर अधिकारियों की टेढ़ी नजर आखिर कब तक रहेगी।
बालोद। बालोद जिला मुख्यालय के सदर रोड पर चल रही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई का बोझ सिर्फ गरीबों, छोटे दुकानदारों और फुटपाथ पर गुजर-बसर करने वालों पर ही डाला जा रहा है, जबकि बड़े और प्रभावशाली कब्जेदारों पर कार्रवाई में नरमी दिखाई जा रही है।
छत्तीसगढ़ क्रांति सेना और जोहार पार्टी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए अब हाईकोर्ट का रुख करने का निर्णय लिया है। दोनों संगठनों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई एकतरफा है और आम लोगों के साथ अन्याय हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर कल हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
बालोद में अतिक्रमण की यह परंपरा सालों से चलती आ रही है, अधिकारी तो हर बार बदल रहे है लेकिन हर बार गरीब की झोपड़ियों पर ही टेढ़ी नजर गड़ाए दिखते है। क्या इस बार भी इस अतिक्रमण में अधिकारियों की मार सिर्फ गरीबों को ही खाना पड़ेगा?
शहर के सबसे व्यस्त माने जाने वाले सदर मार्ग पर प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया था। लोगों को उम्मीद थी कि सड़क चौड़ी होगी, ट्रैफिक की समस्या कम होगी और शहर को राहत मिलेगी। लेकिन लोगों का कहना है कि शुरुआती सख्ती के बाद प्रशासन का रवैया अचानक नरम हो गया।
कलेक्टर कार्यालय में व्यापारियों और प्रशासन के बीच हुई बैठक के बाद सड़क के दोनों ओर केवल दो-दो मीटर तक अतिक्रमण हटाने पर सहमति बन गई। इसके बाद से शहर में यह चर्चा तेज है कि बड़े और स्थायी कब्जों को बचाने के लिए नियमों को ढीला किया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि छोटे दुकानदारों की गुमटियां, अस्थायी दुकानें और गरीबों के ठेले हटाए जा रहे हैं, जबकि वर्षों से सड़क पर काबिज बड़े कारोबारियों और रसूखदारों के कब्जे जस के तस बने हुए हैं। इससे प्रशासन की मंशा और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का यह भी कहना है कि पहले सड़क चौड़ीकरण के लिए जो मानक तय किए गए थे, उन्हें अचानक बदल दिया गया। पहले सेंटर लाइन से 6 से 15 मीटर तक अतिक्रमण हटाने की बात कही गई थी, लेकिन कार्रवाई के दौरान यह सीमा घटाकर केवल दो-दो मीटर कर दी गई। पुराने राजस्व रिकॉर्ड में भी सड़क की चौड़ाई कहीं अधिक दर्ज है।
अब शहर में एक ही सवाल गूंज रहा है
गरीब की झोपड़ी पर ही कार्रवाई क्यों, बड़े कब्जों पर कब गिरेगी गाज?






